देवरिया शेल्टर होम से फर्जी कागजों पर तीन बच्चों को भेजा फ्रांस और स्पेन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित बाल गृह से एक बच्चा और दो बच्चियों को फर्जी कागजातों पर इस वर्ष फरवरी में स्पेन और फ्रांस भेजा गया था। चार वर्ष के अनाथ बच्चे अरविंद को स्पेन के बार्सिलोना की मार्ता ग्वाश को गोद दे दिया गया। वहीं दो बहनों सकीना (9) और शमीमा (7) को फ्रेंच दंपती ब्रुनो बर्नार्ड रेमंड एवं मैरी सिलीन मार्थे को गोद दिया गया।

इस बाल गृह पर बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उनकी तस्करी करने का आरोप लगने के बाद से पुलिस मामले की जांच कर रही है। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में बच्चों को विदेश भेजे जाने का मामला सामने आया है। एसआईटी ने इलहाबाद हाई कोर्ट में चार्जशीट पेश की है, जिसमें कहा गया है कि फरवरी में फर्जी कागजाद पर विदेशियों ने तीन बच्चों को गोद लिया।

पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत अतिरिक्त धाराओं के साथ-साथ जालसाजी, आपराधिक षडयंत्र और मानव तस्करी के आरोप लगाए हैं। इस मामले में मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की संचालक गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन त्रिपाठी, उनके दामाद संजीव और बेटी कंचनलता के अलावा डॉक्टर योगेंद्र कुमार दुबे, नर्स हयात अफरोज और बाल गृह का एक कर्मचारी प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अगस्त महीने में 11 वर्ष की एक बच्ची पुलिस बाल गृह से बचकर निकल गई थी। उसने पुलिस को बताया कि उसके बाल गृह में उसका यौन उत्पीड़न होता था और उसके साथ मारपीट की जाती थी। इसके अलावा अन्य लड़कियों के साथ भी दुर्व्यवहार होता है और उनकी तस्करी की जाती है। इसके बाद देवरिया पुलिस ने प्रेस वार्ता में बाल गृह में चल रही घिनौनी हरकतों का खुलासा किया था।

पुलिस ने बताया था कि कुछ लड़कियों की जबरन शादी करवा दी गई और कई अन्य गायब हो गईं। बाल गृह का लाइसेंस जून 2017 में सस्पेंड हो चुका था, लेकिन वह गैर-कानूनी तरीके से चल रहा था। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में बताया है कि गिरिजा त्रिपाठी ने दुबे को मेडिकल एग्जामिनेशन रिपोर्ट तैयार करने के लिए हायर किया था, ताकि बच्चियों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी द्वारा संचालित इंटर-कंट्री अडॉप्शन प्रोग्राम के तहत विदेश में रह रहे परिवारों को गोद दिया जा सके।