‘दोषी’ आईएएस ने 12 साल से छीन रखा अफसर का प्रमोशन

एक लेखाधिकारी को जांच में आईएएस की गड़बड़ी पकड़ना इतना महंगा पड़ा कि उन्हें प्रमोशन पाने के लिए 12 साल से जंग लड़ना पड़ रही है। आईएएस अफसर के बदला लेने की इंतेहा कुछ ऐसी है कि उन्होंने न तो हाई कोर्ट के आदेश को माना और न ही मुख्यमंत्री के निर्देश को। सबको गलत जानकारी देकर प्रमोशन नहीं होने दिया गया।

वह लेखाधिकारी रिटायर हो चुके हैं, लेकिन खुद का हक पाने के लिए उनकी लड़ाई जारी है। यह मामला है 70 वर्षीय सीताराम कुशवाह का। इन्होंने 13 साल पहले ग्वालियर में लेखाधिकारी रहते इंदौर के तत्कालीन श्रमायुक्त आईएएस एपी श्रीवास्तव की आर्थिक अनियमितता की जांच की थी।

इसमें श्रीवास्तव को दोषी करार दिया गया और सवा लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। बाद में ‘दोषी’ अफसर वित्त विभाग का सचिव बना और सीताराम को पदोन्नति देने वाली कमेटी का सदस्य भी। वित्त विभाग ने लिखित में दिया कि सीताराम पदोन्नति के लिए सबसे सीनियर हैं, लेकिन 2004, 05, 06 की तीन डीपीसी में पदोन्नति नहीं दी गई। अफसर ने सीताराम के नाम के आगे क्रॉस लगा दिया।

बकौल सीताराम, बदले की नीयत से नियमानुसार मिलने वाले प्रमोशन को भी रोक दिया गया। सीताराम को हमेशा वेटिंग लिस्ट में ही रखा। रिटायरमेंट के बाद (2004 व 2005 की डीपीसी छोड़) से 10 सालों में सीताराम 1051 आवेदन (राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट तक) लिख चुके हैं, लेकिन अब भी वे इंसाफ की वेटिंग लिस्ट में हैं।

बेदाग नौकरी, 3 साल में 10 इंक्रीमेंट

आईएएस को दोषी ठहराने से पहले सीताराम को बेहतर सेवाओं के लिए 3 साल में 10 इंक्रीमेंट मिले थे। 45 साल की नौकरी में इनकी सीआर हमेशा बेहतर रही, लेकिन 2002 में श्रमायुक्त एपी श्रीवास्तव पर दो ई-टाइप बंगलों के उपयोग का आरोप लगा। वित्त विभाग ने 2003 में सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण अधिकारी सीताराम से जांच करवाई। इन्होंने दो बंगलों के लिए दोषी पाते हुए एपी श्रीवास्तव के खिलाफ सवा लाख रुपए की रिकवरी निकाल दी।

गृहस्थ जीवन छोड़ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई

1- सीताराम ने सीएम को आवेदन दिया तो वित्त विभाग ने उन्हें झूठा जवाब देकर गुमराह कर दिया। वित्त विभाग ने लिखा कि पदोन्नति के लिए डीपीसी जुलाई में हुई थी। विभाग ने सीताराम को भी 31 जुलाई 2006 में रिटायर होना बता दिया, जबकि सीताराम 31 अगस्त 2006 को रिटायर हुए थे। विभाग ने ये सब इसलिए किया कि सीताराम को प्रमोशन न मिल पाए।

2- सीताराम ने वर्ष 2010 में हाई कोर्ट में केस लगाकर प्रमोशन दिलाने की गुहार लगाई। हाई कोर्ट ने वित्त विभाग से जवाब मांगा। विभाग ने प्रमोशन से पहले रिटायर होने की जानकारी दी। हाई कोर्ट ने शासन को नियमानुसार प्रमोशन देने के आदेश दिए, लेकिन फिर भी प्रमोशन नहीं दिया गया।

इसके बाद सीताराम ने अवमानना का केस लगा दिया। 2014 तक अवमानना का केस की सुनवाई चलती रही, लेकिन अब तक कोई इंसाफ नहीं मिला।

अंतिम सांस तक लड़ूंगा

मां नर्मदा के तट पर रहकर मैं प्रमोशन, वेतनवृद्घि, पेंशन की राशि के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा हूं और अंतिम सांस तक लड़ूंगा। -सीताराम कुशवाह, रिटायर्ड लेखाधिकारी

मैं किसी का प्रमोशन रोकने वाला कौन होता हूं? मुझे ऐसे किसी प्रकरण की जानकारी नहीं है।

 

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