दो तरीके से छापते थे नकली नोट, चमक के लिए अपनाते थे ये ट्रिक

इंदौर। क्राइम ब्रांच ने नकली नोट छापने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टर माइंड सहित 5 अाराेपियों गिरफ्तार किया है। टीम ने इनके पास से दो लाख 60 हजार रुपए के नकली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर, पेपर और केमिकल जब्त किए हैं। पूछताछ में इन्होंने बताया कि अब तक इन्होंने दस लाख रुपए तक के नकली नोट छाप चुके हैं। नोटों की छपाई इस प्रकार से की जाती थी कि आसानी से असली और नकली की पहचान नहीं हो सकती थी।

– डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच को मुखबीर ने सूचना दी थी कि पाटनीपुरा क्षेत्र में कुछ लोग 2000, 500 और 100 रुपए के नकली नोट चलाने की फिराक में घूम रहे हैं। इसके बाद एमआईजी पुलिस के साथ मौके पर पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम ने तीन लोगों को पकड़ा।

– गिरफ्त में आए आरोपी नरेंद्र की तलाशी लेने पर उसके पास से 2 हजार के 15 नोट और 500 के 5 नोट मिले। वहीं राजेश के पास से 2000 के 12 नोट और पांच सौ के 3 नोट मिले। तीसरे साथी चंद्रशेखर की तलाशी लेने पर उसके पास से 2000 के 20 नोट और 500 के 4 नोट बरामद किए।
– पूछताछ में इन्होंने बताया कि उन्हें नकली नोट पीथमपुर का रहने वाला नरेश पवार देता है।
इसके बाद पुलिस नरेश को पकड़ाने पहुंची तो यहां एक मकान में नरेश और रामेश्वर नकली नोट छापते हुए मिले। यहां आरोपी नरेश के पास से टीम को 83500 रुपए के नकली नोट मिले। इसके अलावा नोट छापने के पेपर, छपाई के दौरान खराब नोट वाले पेपर, प्रिंटर, लैपटॉप सहित कुछ अन्य सामान जब्त किए।

10वीं तक पढ़ाई फिर ऐसे बना शातिर धोखेबाज
– अारोपी नरेश ने बताया कि उसने 10 तक की पढ़ाई की है। वह सेठी नगर में अपने परिवार के साथ रहता है। उसने बताया कि वह पहले सिल्वर मॉल में एक दुकान में फोटोकॉपी करता था। वहीं पर उसने दोस्तों के साथ मजाक-मजाक में नोट की फोटो कॉपी निकाली तो वह हूबहू निकली। इसके बाद उसके दिमाग में आया कि अच्छे प्रिंटर से नोट की अच्छी क्वालिटी निकल सकती है। इसके बाद उसने नकली नोट छाने का काम शुरू किया।

– उसने बताया कि एमआईजी पुलिस ने उसे 2005 में नकली नोट छापने के अारोप में बंद किया था। उस समय उसके पास से पुलिस को 40 हजार रुपए के नकली नोट मिले थे। जेल से छूटने के बाद वह फिर से इसी काम में लग गया। 2012 में भी वह पकड़ा चुका है।
10 हजार के बदले 30 हजार के नकली नोट
– नरेश ने बताया कि वह 10 हजार रुपए के बदले 30 हजार रुपए के नकली नोट देता है। जिसे वे भीड़भाड़,  शराब के अड्‌डे, पेट्रोल पंप औ बाजारों में चलाते हैं। ये लोग अंधेरे में ज्यादातर इनका इस्तेमाल करते हैं। उसने बताया कि उसने अपनी गैंग में रामेश्वर, विजय और अभिषेक को शामिल कर रखा था। अभिषेक नोट चलाने का काम करता था।  नरेंद्र, चंद्रशेखर और राजेश को नकली नोट चलाने के लिए दिए थे। जेल से छूटने के बाद वह अब तक 10 लाख के नकली नोट छाप चुका है। इसमें से ज्यादातर नोट राजेश के जरिए उसने गुजरात में खपाए हैं।

दो तरह के नोट छापते थे
– आरोपी नरेश ने बताया कि वह दो तरीके से नोट छापता था। पहले वह एक पेज में तीन नोट चिपकाते थे। इसके बाद उसका प्रिंट आउट निकालते थे। इसके बाद कलर प्रिंट वाले पेपर को बल्व के सामने रखकर पिछले हिस्से को छापने के लिए नोट का मार्जिन बनाते थे। इसके बाद पिछले हिस्से में सेलो टेप की मदद से नोट चिपकाते और प्रिंट निकालते थे।  इसके बाद कटर की मदद से नोट को बारीकी से काटते थे। इसके बाद टोनर और कलर के जरिए नोटों को चमकाते थे। इसके बाद गांधी जी की वाटर इमेज बनाते थे।

– दूसरे तरीके में नोट को स्केन करके मार्जिन सेट करते हुए प्रिंटआउट निकाल लेते थे। नोटों को काटकर पहले चमकाते थे फिर गांधी जी की वाटर इमेज सेट करते थे।