धनतेरस : 46 साल बाद बना कलानिधि योग, बाजार में बरसेगा धन

सुख-समृद्धि और वैभव के पांच दिनी पर्व दीपावली की शुरुआत मंगलवार को धनतेरस के साथ होगी। इस दिन जहां एक ओर 46 साल बाद बन रहे कलानिधि योग में भगवान धनवंतरी संग लक्ष्मी-कुबेर का पूजन होगा वहीं खरीदारों से गुलजार हुए बजारों में धन बरसेगा। साथ ही अकाल मृत्यु के भय से निजात के लिए दीपदान किया जाएगा।

ज्योर्तिविदों के मुताबिक धनतेरस पर इसबार बन रहे खास संयोग में की गई खरीदारी और पूजा अर्चना विशेष फलदायी रहेगी। ज्योर्तिविद् देवेंद्र कुशवाह के मुताबिक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रदोष काल के दौरान वृषभ लग्न के पंचम में शुक्र, मंगल और चंद्रमा की युति से धन लक्ष्मी, वृद्धि और श्रीवत्स योग बन रहा है।

तीन योग एक साथ आने पर कला निधि योग बनता है। इस योग में खरीदारी, पूजन धन-धान्य व सुख समृद्धि प्रदान करता है। ज्योर्तिविद् श्यामजी बापू के अनुसार इस दिन यमराज को दीपदान करने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। इसके साथ ही कुबेर के साथ महालक्षमी का पूजन भी विधि विधान से करना चाहिए।

यू छाएगा उत्सवी उल्लास…

नरक चतुर्दशी : 18 अक्टूबर को नरक चतुदर्शी पर भगवान कृष्ण का पूजन कर रूप लावण्य की कामना की जाएगी। इस दिन तेल-तिल के उबटन लगाकर स्‍नान कर सौंदर्य को निखारने की परंपरा है। इसे छोटी दीवाली भी कहा जाता है।

दीपावली : 19 अक्टूबर को सुख-समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती और कुबेर की पूजा की जाएगी। कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती की परिक्रमा करती है।

गोवर्धन पूजा : 20 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा होगी। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। गाय के बैलों को रंग लगाकर उनकी साज-सज्जा की जाती है।

भाईदूज : 21 अक्टूबर को भाई-बहन के स्‍नेह का पर्व है। इस दिन बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलककर उसके अच्छे भविष्य की कामना करती है। साथ ही कायस्थ समाज भगवान चित्रगुप्त का पूजन करता है।

खरीदारी के श्रेष्ठ मुहूर्त

– शुभ : सुबह 10.35 से 12.09 बजे तक।

– लाभ : सुबह 10.44 से दोपहर 12.09 और शाम 7.27 से 9.01 बजे तक।

– अमृत : दोपहर 12.10 से 1.35 और रात 12.10 से 1.43 बजे तक।

– चर : सुबह 9.17 से 10.43 बजे तक।

लक्षमी-कुबेर पूजन व दीपदान

– प्रदोषवेला: शाम 5.53 से रात 7.59 बजे तक।