नक्सलियों के चंगुल से मुक्‍त हुए IAS एलेक्स अब ‘स्काई’ को दे रहे उड़ान

रायपुर। नक्सलियों के चंगुल से छूटे आइएएस एलेक्स पॉल मेनन फिर चर्चा में हैं। अब वह राज्य सरकार की योजना ‘स्काई’ को उड़ान दे रहे हैं। स्काई योजना में सरकार 55 लाख लोगों के हाथों में मोबाइल पहुंचाने के काम में जुटी है। एलेक्स इसी विभाग में सीईओ हैं और पूरी मुस्तैदी के साथ इस उड़ान को पूरा करने में जुटे हुए हैं।

छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) के वर्तमान सीईओ मेनन का वर्ष 2012 में सुकमा कलेक्टर रहते हुए नक्सलियों ने अपहरण किया था।

हाल ही में एलेक्स एक बार फिर इसलिए चर्चा में आए हैं, क्योंकि उनके अपहरण में शामिल दो नक्सलियों ने पुलिस मुख्यालय में एसआइबी के आला अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया है। नक्सली रवि उर्फ सन्‍ना केरलापाल एलजीएस का कमांडर था। नक्सली कमांडर आकाश के साथ रवि भी एलेक्स के अपहरण में शामिल था।

आत्‍मसमर्पण के बाद रवि ने खुलासा किया कि तत्कालीन कलेक्टर को अगवा करने के लिए पांच तेज-तर्रार नक्सलियों को जिम्मेदारी दी गई थी। इस टीम को नक्सली कमांडर आकाश लीड कर रहा था। रवि पर पांच लाख रुपये का इनाम भी है।

सुकमा जिले के तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को मध्यस्थता के बाद तीन मई 2012 को रिहा किया गया था। माओवादियों की ओर से नियुक्त वार्ताकार बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल नक्सलियों से वार्ता के लिए ताड़मेटला के जंगलों में गए और एलेक्स की रिहाई में महत्वर्पूण भूमिका निभाई थी।

मेनन ने उस समय कहा था कि मैं मध्यस्थों, राज्य सरकार और सभी वरिष्ठ अधिकारियों को धन्यवाद देता हूं। 21 अप्रैल 2012 को एलेक्स पॉल मेनन का अपहरण किया गया था। उसके बाद माओवादियों ने उनकी रिहाई के बदले कई मांगें रखी थीं।

सोशल मीडिया पोस्ट से बने रहे विवादों में

एलेक्स सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कई बार विवादों में रहे। उन्होंने आरुषी-हेमराज मामले पर एक ट्वीट किया था, जिस पर जमकर बवाल हुआ। उन्होंने लिखा था कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, आरुषी-हेमराज केस इसका प्रमाण है। एलेक्स ने 18 जून 2016 को फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर सवाल पूछा था कि देश की कानून व्यवस्था में क्या यह पूर्वाग्रह है कि मौत की सजा पाने वालों में 94 फीसद मुस्लिम या दलित ही हैं। उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया में काफी चर्चित रही थी।

यह है सरकार की स्काई योजना

छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने 55 लाख परिवारों में स्मार्टफोन बांटने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए संचार क्रांति योजना शुरू की गई है। दो चरणों में इस योजना के तहत 55 लाख से ज्यादा स्मार्ट फोन का वितरण किया जायेगा। इसके लिए 12 सौ करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इस साल लगभग 50 लाख परिवारों को स्मार्ट फोन मुहैया कराने का अभियान 26 जुलाई से शुरू हुआ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बस्तर में इस योजना को हरी झंडी दिखायी थी। स्मार्टफोन कॉलेज के छात्रों और एक हजार से अधिक जनसंख्या वाले शहर में रहने वाले गरीब परिवारों की महिलाओं को दिया जाएगा।