नक्सलियों व आतंकियों से हो सकता है टेलीफोन एक्सचेंज गैंग का संबंध

दिल्ली व मुंबई में अवैध रूप से दस टेलीफोन एक्सचेंज संचालित करने वाले गैंग का कनेक्शन आतंकवादी संगठनों व नक्सलवादियों से भी हो सकता है।

आईजी प्रदीप गुप्ता ने स्वयं यह बात स्वीकार की और दावा किया कि गैंग के गिरफ्तार सदस्यों से इस बिन्दु पर सख्ती से पूछताछ होगी। वैसे भी यह गैंग चीन की स्काई लाइन कंपनी से जुड़ा है। पूछताछ में गैंग के सदस्यों ने स्वीकार किया है कि यही कंपनी मुंबई-दिल्ली के एजेंटों के जरिए इस अवैध कारोबार का संचालन कर रही थी।

ऐसे फूटा गैंग का तगड़ा नेटवर्क

मोवा,पंडरी निवासी रोशन को अज्ञात मोबाइल नंबर से 25 लाख रूपए की लाटरी लगने के फर्जी कॉल की शिकायत पंडरी थाने में दर्ज होने के बाद पड़ताल में पता चला कि यह कॉल पैरलल अवैध टेलीफोन एक्सचेंज (सिम बाक्स) के माध्यम से किया गया है।

नेटवर्क फैलाने के लिए अलीबाबा का सहारा

पुलिस अफसर ने बताया कि गिरफ्त में आए गैंग के सरगना ने स्वीकार किया कि चीन की स्काई लाइन कंपनी के प्रोडक्ट सिम बाक्स और सिम बैंक को ऑनलाइन शापिंग एप अली बाबा के माध्यम से 1 लाख 60 हजार रूपए में खरीद करते हैं। इस काम में गैंग की मदद स्काई लाइन कंपनी का हेड एरिस नामक व्यक्ति करता आ रहा है।

ऐसे फैलाया अवैध संचार नेटवर्क

दिल्ली-मुंबई में गैंग ने जितने भी सिम बॉक्स, सिम बैंक इस्टॉल किए गए हैं, उनका सर्वर चीन में है। गैंग के मास्टर माइंड मूलतः कुशीनगर, उप्र निवासी गिरजा शंकर राव, विवेक टंडन और विपल टंडन ने बताया कि एरिस ही उन्हें सारा भुगतान विदेशी करेंसी में करता था, जबकि भारत में वेस्टन यूनियन मनी ट्रांसफर एजेंसी से भारतीय मुद्रा के रूप में उन्हें मिलता था।

प्रति मिनट काल पर 13 व 16 पैसे का फायदा

आरोपियों ने बताया कि एक इंटरनेशनल कॉल के एवज में उन्हें प्रति मिनट दिल्ली में 13 पैसे व मुंबई में 16 पैसे के हिसाब से कमीशन एरिस से मिलता था। पुलिस टीम जब्त सिम बैंक, सिम बाक्स में चले हुए मोबाइल नंबरों के जरिए दूर संचार नियामक प्राधिकरण से टेलीकॉम इंडस्ट्री को हुए आर्थिक नुकसान की जानकारी ले रही है।

टेलीकॉम कंपनियों में कर चुके हैं काम

गिरफ्त में आए गैंग के ज्यादातर सदस्य विभिन्ना टेलीकॉम कंपनियों एयरटेल, टाटा, रिलायंस तथा एमटीएस में कई साल तक काम कर चुके हैं। लिहाजा उन्हें टेली कम्यूनिकेशन्स की प्रक्रियाओं की तकनीकी जानकारी है।

सिम लेने बना रखी थी फर्जी कंपनियां

आरोपियों ने बताया कि सिम बाक्स व सिम बैंक में उपयोग के लिए वे बल्क में सिम लेने के लिए कई फर्जी कंपनियां भी बना रखी थी। फर्जी आधार कार्ड का उपयोग कर वे आसानी से बड़ी संख्या में सिम खरीद लेते थे।

इनकी एसके इंटरप्राइजेस, अर्थ एम्पायर लिमिटेड तथा वन स्काई शॉप नामक कंपनियों की भी पुलिस अब हिस्ट्री खंगालेगी। देश के अन्य शहरों में संचालित टेलीफोन एक्सचेंज और गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों की जानकारी ली जा रही है।