नर्स बोले बच्‍चा हुआ है तो आप भी इसका मतलब ऐसा मत समझ लेना, रहे सतर्क

एसएनसीयू वार्ड में भर्ती एक नवजात बच्चे को बदलने का आरोप परिजन द्वारा अस्पताल प्रबंधन पर लगाया है। नवजात के परिजन का कहना था कि उनके यहां लड़का हुआ है, लेकिन एसएनसीयू वार्ड के कर्मचारियों ने उन्हें लड़की थमा दी। जबकि प्रसव के बाद आम बोलचाल की भाषा में नर्सों ने कहा था कि बच्चा हुआ तो परिजन समझे कि बेटा पैदा हुआ और उन्होंने पर्चियों में भी बच्चे का जेंडर मेल लिखवा दिया।

परिजन का कहना कि जब वे वार्ड में पूछताछ करने गए तो वार्ड के कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। जिसके बाद अस्पताल में शुक्रवार की रात हुआ बवाल शनिवार की दोपहर थमा। सिविल सर्जन ने परिजन के साथ आए कुछ वरिष्ठ लोगों को अस्पताल के रजिस्टर में बच्चे की एंट्री दिखाई तब जाकर मामला शांत हुआ। इस दौरान वार्ड में आने वाली महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार पथरिया थाना अंतर्गत रहने वाली पूजा पति चंद्रभान सेन (20 वर्ष) को 2 अक्टूबर की दोपहर प्रसव पीड़ा के चलते जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जहां तरकीबन 6 बजे पूजा ने एक नवजात को जन्म दिया। जिसका वजन एक किलो 280 ग्राम था। बच्चे के वजन के साथ वह कम दिनों का भी था। इसी के चलते डॉक्टरों ने बच्चे को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया।

जहां भर्ती से पहले बनने वाली ओपीडी और आइपीडी पर्ची में बच्चे का जेंडर फीमेल की जगह मेल लिख गया। जिस पर किसी की नजर नहीं पड़ी और एसएनसीयू वार्ड में भी बनने वाले पास में भी नवजात को मेल ही लिख दिया, लेकिन एसएनसीयू के अंदर बनने वाले रिकार्ड में नवजात का जेंडर फीमेल ही लिखा था। तीन दिन तक बच्ची को भर्ती रहने के बाद शुक्रवार की रात उसकी मां को फीडिंग के लिए बुलाया था। जहां उसे एक बच्ची दी गई जिसे देखकर मां ने वार्ड के बाहर खड़े परिजन से कहा कि जल्दी आओ बच्चा बदल गया। यह सुनते ही परिजन के होश उड़ गए और अस्पताल प्रबंधन पर बच्चा बदलने के आरोप लगाने लगे।

आरोप लगाते-लगाते हो गई सुबह

यह माजरा शुक्रवार की रात से शुरू होकर शनिवार की दोपहर तक चलता रहा। जब सिविल सर्जन के साथ ही समाज के कुछ अन्य लोग भी अस्पताल पहुंचे और रजिस्टर की जांच पड़ताल की तो उन्हें सच्चाई का पता चला।

दादी और मां को नहीं हो रहा विश्वास

अस्पताल प्रबंधन ने पूरी जांच के बाद परिजन को यह विश्वास दिलाया कि उनकी बहू के यहां बेटी ही हुई थी। जिससे घर के कुछ लोग तो इस बात को मान गए, लेकिन मां पूजा की दादी खिलोना बाई और उसकी सास आशा सेन यह बात मानने को तैयार नहीं कि उनकी बहू के यहां बेटी हुई है। उनका कहना है कि हमने तो नर्सों के हाथ में लड़का ही दिया था जिसे अस्पताल के कर्मचारियों ने बदल दिया है।

इस संबंध में सिविल सर्जन ममता तिमोरे का कहना है कि जरा सी भूल के कारण ही इतना बवाल खड़ा हो गया। जबकि एसएनसीयू वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के पहले ही मरीज के परिजन को जेंडर बताकर ही लिखा जाता है। जब वे भी इस बात से सहमत हो जाते हैं तभी बच्चे को भर्ती किया जाता है।