नहीं रहीं स्वच्छ भारत म‍िशन की मिसाल कुंवर बाई

छत्तीसगढ़ में अपनी बकरी बेचकर शौचालय बनाने को लेकर सुर्खियों में आई 106 साल की कुंवर बाई का निधन हो गया है. शुक्रवार को रायपुर स्थित आंबेडकर अस्पताल में उनका देहांत हुआ.

करीब डेढ़ साल पहले जब प्रधानमंत्री मोदी को पता चला कि राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में कुंवर बाई ने बकरी बेच कर स्वच्छ भारत अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज की है तो उन्होंने उनसे मुलाकात की थी.

प्रधानमंत्री ने कुंवर बाई के चरण छू कर आशीर्वाद लिया था. कुंवर बाई ने मरने से पहले एक बार पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम रमन सिंह से मिलने की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन ये संभव नहीं हो पाया.

कुंवर बाई ने 22 हजार रुपये में अपनी बकरियां बेच दी थी, फिर इस रकम से शौचालय बनाया था. कुंवर बाई डायबिटिज और हाइपर टेंशन की बीमारी से जूझ रही थीं. उन्हें लकवा भी मार गया था. कुंवर बाई का अंतिम संस्कार उनके गृह नगर धमतरी में किया गया.

पिछले दो हफ्ते से कुंवर बाई की तबीयत खराब चल रही थी. कुछ दिनों पहले ही उन्हें धमतरी से रायपुर रेफर किया गया था. कुंवर बाई के निधन पर मुख्यमंत्री रमन सिंह समेत कई राजनेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है.

मुख्यमंत्री रमन सिंह की कोशि‍श से कुंवर बाई के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी. सीएम ने उनके रिश्तेदारों से भी बात की थी, लेकिन उम्रदराज होने के चलते उनका स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया.

2016 में स्वच्छता अभियान के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनांदगांव आए थे. तब इतनी बुजुर्ग महिला को मंच पर देखकर वो हैरत में पड़ गए. मंच पर स्वच्छता के क्षेत्र में अनूठा काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया जा रहा था.

जब प्रधानमंत्री को बताया गया कि कुंवर बाई ने बकरी बेचकर अपने गांव में शौचालय बनवाया है तब यह सुनते ही प्रधानमंत्री गदगद हो गए. उन्होंने कुंवर बाई के पैरों को दोनों हाथ से प्रणाम किया. इसके बाद दिल्ली में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में बोलते हुए उन्होंने कुंवर बाई का जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा में दो-दो बार अपने भाषण में कुंवर बाई को याद किया.