नासमझ था तब नक्सली ले गए, लौट आता तो ये दिन न देखना पड़ता

राजनांदगांव(रायपुर)।कंपकपाते हाथों से पिता ने मुक्तिधाम में अपने बेटे की चिता को अग्नि दी। वह फफक-फफक पर रो रहा था, लडखड़़ाते जुबां से उसने यह बोलने से भी परहेज नहीं किया कि जिस उम्र में मुझे तेरे (बेटे) हाथ मुखाग्नि मिलनी चाहिए, वह काम मैं खुद कर रहा हूं। खड़गांव के कोपेनकड़ा एनकाउंटर में मारे गए नक्सली रंजीत का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उसके पिता सुकलाल और बड़ा भाई सुक्कू पहुंचा।
– बेटे के शव को चिता देने के बाद सुकलाल ने रंजीत के बचपने की बातों को कुरेदने लगे। उन्होंने राेते हुए कहा … तुझे कितनी बार घर बुलाया पर तू नहीं आया, बचपन में तुझे जबरन नक्सली साथ ले गए पर जब तू समझदार हुआ तब तो लौट आता।
– पूरा परिवार कितनी शांति से जीवन जी रहा है, और तू जंगलों की खाक छानता रहा। समय रहते लौट क्याें नहीं आया बेटा। आज मेरे मरने की उम्र में मैं तेरी चिता जला रहा हूं। ये मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन है। अगर तू अपनी करनी सुधार लेता तो शायद मुझे ये दिन न देखना पड़ता।
– रंजीत के शव के सामने राेते हुए सुकदेव बाकी नक्सलियों से भी लौटने की अपील करता रहा, उन्होंने अपने शब्दों में कहा कि तू तो नहीं बच सका बेटा, पर अपने बाकी बच्चों से विनती करता हूं, कि तुम लोग घर लौट आओ। सुकदेव उंचापुर से अपने बेटे की मौत की खबर लगते ही उसे देखने पहुंचे।
13 साल की उम्र में साथ ले गए थे नक्सली
– उन्होंने बताया कि रंजीत जब सातवीं कक्षा में पढ़ता था, तब उसे केस्कोडो दलम के नक्सली कमलेश, सरिता व मानू उसे और गांव के एक लड़के को ले गए थे। तब पूरे गांव के लोगों ने उन्हें छोड़ देने की विनती की थी। लेकिन नक्सली नहीं माने।
– सुकेदव ने नक्सलियों के इस कृत्य का भी डटकर विरोध करने की बात ग्रामीणों से कही है। उन्होंने कहा वे तो अपने बच्चे को नहीं बचा सके, लेकिन दूसरे बच्चों काे नक्सली बनने से रोका जा सकता है।
दो लाशें भी सुरक्षित रखी, कोई देखने आए
– मुठभेड़ में पुलिस ने तीन नक्सलियों को ढेर किया था। जिसमें दो अन्य नक्सली राकेश दुगा और महेश पोत्तावी का भी शव पुलिस ने सुरक्षित रखा है। पुलिस ने इनके परिजनों को भी सूचना भेजी है। पुलिस मानवीय संवेदना दिखाते हुए उनके परिजनों के पहुंचने का भी इंतजार कर रही है, ताकि वे भी अपने भटके हुए बच्चे को अंतिम बार देख सके। पुलिस ने क्षेत्रों में भी इस संबंध में सूचनाएं प्रसारित कर दी है ताकि कोई परिजन अंतिम दर्शन के लिए अा सके।