नीरव मोदी धोखाधड़ी बैंक का मुद्दा है, सरकार से मदद नहीं मांगेंगे: पीएनबी प्रबंध निदेशक

नई दिल्ली: पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के प्रबंध निदेशक सुनील मेहता ने कहा है कि जौहरी नीरव मोदी की बैंक के साथ 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से उत्पन्न समस्याओं को खुद से सुलझा लेगा और सरकार की कोई सहायता नहीं लेगा. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की धोखाधड़ी से उत्पन्न चुनौतियों से पार पाने के लिये बैंक के पास पर्याप्त संसाधन और क्षमता है. यह पूछे जाने पर कि क्या बैंक ने धोखाधड़ी के कारण समस्याओं से पार पाने के लिये शेयरधारकों से मदद मांगी है , मेहता ने पीटीआई भाषा से बातचीत में कहा , ‘‘… यह समस्या बैंक की है और हम इसका स्वयं समाधान करेंगे. हम पूंजी डाले जाने के रूप में सरकार से मदद की मांग नहीं कर रहे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने बैंकों को जो घन दिया है, वह पूंजी डाले जाने की योजना के तहत सामान्य प्रक्रिया है. हमने कोई अतिरिक्त सहायता की मांग नहीं की है क्योंकि हमें लगता है कि पीएनबी के पास पूंजी जुटाने की क्षमता है.’’ इस बारे में विस्तार से बताते हुए मेहता ने कहा, ‘‘पीएनबी ने पिछले वित्त वर्ष में सितंबर में मोटे तौर पर 12,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटायी.’’

इसमें 5,000 करोड़ रुपये पात्र संस्थागत नियोजन, 1,300 करोड़ रुपये पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस में हिस्सेदारी बेचकर तथा 5,400 करोड़ रुपये सरकार की पूंजी के जरिये जुटायी गयी. उन्होंने कहा, ‘‘… कर्ज कारोबार को आगे बढ़ाने के लिये हमारे पास पर्याप्त पूंजी है.’’

मेहता ने कहा, ‘‘इसके अलावा हमने वित्त वर्ष 2017-18 की तीन तिमाहियों में 1,100 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया … अत : लाभ के साथ जो पूंजी जुटायी है, उससे नुकसान से निपटने तथा आगे बढ़ने में मदद मिलेगी.’’  गौरतलब है कि नीरव मोदी और उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी ने कुछ बैंक अधिकारियों के साथ साठगांठ कर बैंक से गारंटी पत्र प्राप्त किया और 13,000 करोड़ रुपये का चुना लगाया.