परिवार में नहीं कोई साक्षर, तय किया डॉक्टर बनने तक का सफर

जोधपुर. जुनून के आगे हर समस्या और कठिनाइयां बौनी हो जाती है। अभावों और विपरित परिस्थितियों में जहां आम आदमी हार मानकर टूट जाता है वहीं नरेश कंवरिया ने हर चुनौती को स्वीकार किया। बिलाड़ा तहसील के कंवरियानगर ढाणी निवासी नरेश कंवरिया ने सभी विपरित परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए डॉक्टर बनने का सफर तय किया। उदयपुर के आरएनटी कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले नरेश अब पीजी करने के लिए तैयारियों में जुटे हैं।पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर के नरेश के घर में माता-पिता निरक्षर हैं। बहनें भी नहीं पढ़ी और भाइयों ने कुछ कक्षाएं पढ़कर पढ़ाई बीच में छोड़ दी। पूरे गांव में साइंस लेने वाला नरेश पहला लड़का था। नरेश ने बताया कि गांव में 5 वीं तक ही स्कूल था। आगे की पढ़ाई के लिए 10 किलोमीटर रणसी गांव जाना पड़ता था। नरेश के पास न तो बस के लिए पैसे थे और न ही साइकिल। पैदल जाकर नरेश ने 81 फीसदी अंकों के साथ दसवीं पास की। इसके बाद तिलवासनी के नवोदय विद्यालय से 71 फीसदी अंकों के साथ 12 वीं उत्तीर्ण की।

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