पिता की अंगदान की इच्छा पूरी करने बेटी ने परिवार के डेड़ सौ लोगों से लिया विरोध

एक बेटी के लिए परिवार के करीब डेढ़ सौ लोगों का विरोध लेना आसान नहीं था। लेकिन, पिता की अंगदान करने की इच्छा पूरी करने के लिए उसने किसी की नहीं सुनी। जब डॉक्टर और काउंसलर्स ने बताया कि उसके पिता के अंगों से तीन लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है तो उसने हां करने में देरी नहीं की। राजधानी के कटारा हिल्स में रहने वाले 48 साल के विष्णु कुमार के निधन के बाद पत्नी और बेटी श्रद्घा ने उनके अंग दान कर दिए।

उनका लिवर बंसल अस्पताल, एक किडनी चिरायु और एक सिद्घांता रेडक्रास अस्पताल में तीन मरीजों को लगाई गई। श्रद्घा ने बताया कि पापा को ब्लड प्रेशर था। बीच में उन्होंने दवाएं छोड़ दी थी। इस वजह से मंगलवार को ब्रेन हैमरेज हो गया था। इलाज के लिए पहले रेडक्रास अस्पताल ले गए, तो डॉक्टरों ने कहा सब ठीक है घर ले जाओ।

हालत बिगड़ी तो विवेकानंद स्पाइन सेंटर ले गए। बुधवार सुबह उन्हें बे्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद सभी टेस्ट कर गुरुवार शाम को बंसल अस्पताल ले जाकर आर्गन निकाले गए। बेटी ने बताया कि पापा ने घर वालों की मर्जी के खिलाफ शादी की थी, इसलिए परिवार के लोग पत्नी और बेटी की अंगदान की बात से सहमत नहीं थे।