पूजा करते समय क्या करें और क्या नहीं, इन जरूरी नियमों को भूलने की गलती न करें

देवी-देवताओं का पूजन करने से दुख-दर्द तो दूर होते हैं, साथ ही शांति भी मिलती है। इसी कारण पुराने समय से ही पूजन की परंपरा चली आ रही है। जिन घरों में हर रोज पूजा की जाती है, वहां का वातावरण सकारात्मक और पवित्र रहता है। दीपक के धुएं से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्म कीटाणु भी मर जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार पूजन के लिए कई आवश्यक नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करते हुए पूजा करने पर श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं। यहां जानिए उज्जैन के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. सुनील नागर के अनुसार 10 नियम जो कि पूजा-पाठ करते समय ध्यान रखना चाहिए…

1. यदि आप प्रतिदिन घी का एक दीपक भी घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे।

2.सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। सुख की इच्छा रखने वाले हर मनुष्य को प्रतिदिन इन पांचों देवों की पूजा अवश्य करनी चाहिए। किसी भी शुभ कार्य से पहले भी इनकी पूजा अनिवार्य है।

3. शिवजी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों और तुलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए। सूर्यदेव की पूजा में अगस्त्य के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। भगवान श्रीगणेश की पूजा तुलसी के पत्ते नहीं रखना चाहिए।

4. सुबह नहाने के बाद ही पूजन के लिए फूल तोड़ना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार जो व्यक्ति बिना नहाए फूल या तुलसी के पत्ते तोड़कर देवताओं को अर्पित करता है, उसकी पूजा देवता ग्रहण नहीं करते है।

5. पूजन में अनामिका उंगली (छोटी उंगली के पास वाली यानी रिंग फिंगर) से गंध (चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी) लगाना चाहिए।

6. पूजन में देवताओं के सामने धूप, दीप अवश्य जलाना चाहिए। नैवेद्य (भोग) भी जरूरी है। देवताओं के लिए जलाए गए दीपक को स्वयं कभी नहीं बुझाना चाहिए।

7. गंगाजल, तुलसी के पत्ते, बिल्वपत्र और कमल, ये चारों किसी भी अवस्था में बासी नहीं माने जाते हैं। इसलिए इनका उपयोग पूजन में कभी भी किया जा सकता है। इन चार के अलावा भगवान को कभी भी बासी जल, फूल और पत्ते नहीं चढ़ाना चाहिए।