प्यार में सफलता चाहिए, तो करें शुक्र की उपासना

हिंदू धर्मग्रंथों में शुक्र ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान है। इस ग्रह के अस्त होने पर शादियां नहीं होती हैं। शुक्र ग्रह को वैभव, धन, संतान और ऐश्वर्य के साथ ही प्रेम का कारक भी माना गया है। ग्रीक मान्यताओं में भी शुक्र (वीनस) को प्रेम की देवी बताया गया है। कहा जाता है कि यदि किसी को प्रेम में सफलता नहीं मिल रही है तो शुक्र की उपासना करे।

शिव पुराण में शुक्र को प्रसन्न करने के उपाय बताए गए हैं। शादी के बाद पति-पत्नी के बीच कैसे संबंध रहेंगे, यह बात शुक्र ग्रह से दोनों की दशा पर ही निर्भर करता है। शुक्र को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को इस ग्रह की पूजा की जाती है। शुक्रवार को पत्नी को साड़ी गिफ्ट की जाए तो शुक्र देवता प्रसन्न होते हैं।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हीरा शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। शुक्र को सुंदरता और स्त्री वर्ग के साथ जोड़ा गया है। इसीलिए हीरे का गहरा संबंध स्त्री वर्ग से स्थापित होता है और यह महिलाओं को खासा पसंद होता है।

शुक्र का इन राशियों से है सीधा संबंध

वहीं, शुक्र ग्रह के अस्त होने से तुला और वृषभ राशि के जातक ज्यादा प्रभावित होंगे। विशेष रूप से इन राशि के जातकों को धन से संबंधित कार्यों को सोच समझकर करना होगा। साथ ही वे जातक जिनकी कुंडली में शुक्र किसी भी तरह से विपरीत अवस्था में है तो इन जातकों को धन के लेनदेन को लेकर सावधानी बरतनी होगी। वे जातक जो मधुमेह रोग से ग्रस्त हों उन्हें शुक्र के अस्त रहने की अवधि में परेशानियों से गुजरने की संभावना बढ़ जाती है।

शुक्र के अस्त की अवधि तक कर्ज की अधिकता अथवा बहुत बड़ा लेनदेन करने से बचना चाहिए। पति-पत्नी के जीवन में शुक्र ग्रह काफी मायने रखता है, यह प्रेम, प्यार, संतान का प्रतीक माना जाता है, कुंडली में शुक्र अच्छी स्थिति में हो तो पति-पत्नी का दांपत्य जीवन खुशहाल बीतता है और श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है इसलिए शुक्र के अस्त होने की स्थिति में विवाह नहीं करना चाहिए चाहे परिस्थिति कितनी भी विपरीत हो और विवाह करना जरूरी हो तो भी विवाह को टालना चाहिए और शुक्र के उदित होने का इंतजार करना चाहिए।