फिर संकट में ‘काला सोना’

चित्तौडग़ढ़. चित्तौडग़ढ़ जिले की व्यावसायिक फसल अफीम मौसम की मार से जूझ रही है। लगातार रोगों के हमले ने अफीम उत्पादकों का दिन का चैन और रातों की नींद छीन ली हैं। मृदुरोमिल से मुकाबला कर रही इस फसल अब लाही की चपेट में भी आ गई है। कई जगह से तना गलने की भी शिकायतें आ रही हैं।

फफूंद जनित मृदुरोमिल रोग के बीजाणु जमीन में रहते हैं और बुवाई के बाद ये पौधों पर हमला शुरू कर देते हैं। जिन खेतों में अफीम की बुवाई की जाती है, उनमें गत बार की फसल के रोगग्रस्त अवशेष जमीन में ही रह जाते हैं। अगली बार जब बुवाई की जाती है तो यह रोग फिर फसल पर हमला कर देता है। पिछले एक सप्ताह से तापमान में गिरावट, औंस पडऩे और मौसम में नमी के चलते अफीम की फसल में यह रोग तेजी से फैल रहा है।

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