फीके पड़े चायनीज दीये, स्थानीय और राजस्थानी दीयों की मांग

दीपों के पर्व दीपावली में मिट्टी के दीयों को खास महत्व है। दशहरा मनते ही बाजार में दीये आने लगे हैं। स्थानीय दीयों के अलावा राजस्थानी डिजाइनर दीये बिक रहे हैं। राजस्थानी दीयों की कलाकृति चायनीय दीयों से काफी अच्छी है।

बाद की भीड़ से बचने के लिए ग्राहकों ने दीयों की खरीदारी भी शुरू कर दी है। चायनीज दीयों से राहत पाए दीया दुकानदार अच्छे कारोबार की उम्मीद लगा रहे हैं। ग्राहकों और व्यापारियों के जागरूक होने से चायनीज दीयों की बिक्री फीकी पड़ गई है। कालीबाड़ी चौक के पास वर्षों से मिट्टी के बर्तन बेच रहे दुकानदारों का कहना है कि इस वर्ष ग्राहक सीधे मिट्टी के दीये मांग रहे हैं।

जीएसटी ने बढ़ा दी कीमत

लकड़ी पर 8 प्रतिशत जीएसटी लगने से मिट्टी के दीये पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जरा महंगे मिल रहे हैं। लकड़ी का इस्तेमाल दीयों को पकाने में होता है। गोलबाजार में मिट्टी के बर्तन बेचने वाले दुकानदार ने बताया कि जीएसटी से पहले लकड़ी पर 5 फीसदी टैक्स था।

बुरादे की कीमत भी 8 से बढ़कर 10 रुपए किलो हो गई है। इस वजह से मिट्टी के बर्तन प्रति नग दो से पांच रुपए तक महंगे हो गए हैं। दीया, कोसा, टोटी हंडी, तुलसी पूजा, कलर दीये, कलश, गुल्लक, नांद, दीपक हंडी आदि के कीमतों में लगभग दो रुपए की तेजी आई है।

लुभा रहे चहुंमुखी और कलर दीये

चायनीज पैटर्न में राजस्थानी चहुंमुखी कलर दीये, दीपक हंडी और कलश ग्राहकों को लुभा रहे हैं। दीपावली से पहले 8 अक्टूबर को करवाचौथ है। इसलिए इन दीयों की खरीदारी बढ़ गई है। इसके साथ ही स्वास्तिक, ओम, कमल, लक्ष्मी मां के चित्र अंकित लोकल दीयों की भी मांग बढ़ी है।

दीये की कीमत (दुकानदार के मुताबिक)

दीया नई कीमत पुरानी कीमत

सादा दीया – 2 रु. नग -1 रु.

कलर दीया – 5 रु. नग -3 रु.

हुमाही – 10-30 रु. नग -8 से 20 रु.

छोटा दीया – 1 रु. नग -50 पैसा

टोटी हंडी – 20 से 40 रु. नग -15 से 25 रु.

गुल्लक – 10 से 40 रु. नग -5 से 30 रु.

राजस्थानी चहुंमुखी दीया -50 रु. नग -40 रु.

तुलसी पूजा कुंड – 100 से 140 रु. -नग 80 से 120

कलश कलर वाला – 15-50 रु. नग -12 से 40 रु.

दर्जन में सादा दीया- 20 रुपया 15 रु.

दर्जन में कलर दीया – 50 रुपया 35 रु.