फ्लोर टेस्ट से पहले येदियुरप्पा का इस्तीफा, कहा- हो सकता है कर्नाटक में 5 साल से पहले ही चुनाव आ जाए

बेंगलुरु. भाजपा के पास बहुमत का आंकड़ा न होने की वजह से मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शपथ लेने के 55 घंटे बाद शनिवार को इस्तीफा दे दिया। येदियुरप्पा ने 17 मई को अकेले शपथ ली थी। येदियुरप्पा ने बहुमत का प्रस्ताव पेश तो किया, लेकिन फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं गए। इससे पहले उन्होंने करीब 20 मिनट तक भावुक स्पीच दी। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस और जेडीएस के खिलाफ जनादेश है। अगर हमें 113 सीटें मिली होती तो आज स्थिति कुछ और होती। चुनाव कब आएगा मालूम नहीं। 5 साल बाद आएगा या इसके पहले भी आ सकता है। मैं फिर लौट के आऊंगा। इससे पहले दिन भर बहुमत का ड्रामा चला। कभी बीजेपी के पास बहुमत होने और न होने की खबरें आती रहीं। यहां तक कि कांग्रेस और जेडीएस के दो-दो विधायकों के गायब होने की खबर आई। आखिर में इस गठबंधन के सभी विधायक (कांग्रेस 78 + जेडीएस 37) सदन में पहुंच गए।

येदियुरप्पा के इस्तीफा देने की वजह

1) …क्योंकि गोवा, मणिपुर, मेघालय से सबक लेते हुए कांग्रेस पहली बार इतनी एक्टिव दिखाई दी कि उसने नतीजे साफ होने से पहले ही जेडीएस को अपने पाले में कर लिया। भाजपा को जोड़तोड़ का मौका ही नहीं दिया। राज्यपाल से येदियुरप्पा को मिले 15 दिन के वक्त को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर कम करा दिया। येदियुरप्पा को शपथ ग्रहण के 55 घंटे भीतर ही फ्लोर टेस्ट के लिए आना पड़ा।

2)क्योंकि आंकड़े पक्ष में नहीं थे। पहले कांग्रेस के चार और बाद में दो विधायकों सदन में नहीं पहुंचने की खबरें थीं। लेकिन बाद में सभी ने शपथ ले ली। ऐसे में विपक्षी सदस्यों की गैरहाजिरी से संख्याबल को अपने पक्ष में कर लेने की भाजपा की उम्मीद खत्म हो गई।

3) क्योंकि मौजूदा संख्या बल के मुताबिक भाजपा बहुमत पाने की स्थिति में ही नहीं थी। 2 सीटों पर मतदान नहीं होने के बाद विधानसभा में सदस्यों की संख्या 222 थी। एक प्रोटेम स्पीकर भाजपा से ही बना। ऐसे में संख्या 221 हो गई। कुमारस्वामी दो सीटों से चुने गए। इसलिए संख्या 220 हो गई। बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 111 हो गया। भाजपा के 104 में से प्रोटेम स्पीकर का एक वोट और कम हो गया। उसके पास 103 ही विधायक बचे। वहीं, आखिर तक सदन में कांग्रेस (78) और जेडीएस+ (38-कुमार स्वामी = 37) की कुल संख्या 115 बनी रही। कांग्रेस ने दो निर्दलीय विधायकों को अपने साथ कर लिया।

4) क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले सीक्रेट बैलेट वोटिंग पर रोक लगा दी और बाद में यह भी कहा कि फ्लोर टेस्ट के दौरान मत विभाजन हो और लाइव टेलीकास्ट हो। ऐसे में विधायकों के लिए क्रॉस वोटिंग करना मुश्किल हो गया। क्रॉस वोटिंग करने पर वे सीधे अपनी पार्टी की नजर में आ सकते थे और सदस्यता जा सकती थी।

कर्नाटक में आगे क्या होगा?

कांग्रेस और जेडीएस मिलकर सरकार बनाएंगे। अगले मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो वे दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे पहले वे 3 फरवरी 2006 से लेकर 8 अक्टूबर 2007 तक मुख्यमंत्री रहे। उस वक्त बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

आलाकमान से बात कर येदि शक्ति परीक्षण के लिए नहीं गए

– बताया जा रहा है कि जब भाजपा को इस बात का आभास हो गया कि वह बहुमत जुटा नहीं पाएगी। तब यह फैसला किया गया कि वह फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं जाएंगे। इसके बाद येदियुरप्पा ने सदन में बहुमत के प्रस्ताव पेश किया और भावुक भाषण दिया।

– येदियुरप्पा ने कहा- “मैं राज्य की जनता को आश्वासन देता हूं, जब तक मैं हूं। मैं राज्य में हर जगह जाउंगा और लोगों से मिलूंगा। हम सब फिर से कोशिश करेंगे और फिर जीतकर आएंगे। चुनाव कब आएगा मालूम नहीं। 5 साल बाद आएगा या इसके पहले भी आ सकता है। मैं फिर लौट के आऊंगा।”

– ” हम लोकसभा चुनाव में 28 में से 28 सीटें जीतेंगे।”

दिनभर आरोप का दौर चला, येदियुरप्पा पर लगा 15 करोड़ या मंत्री पद का ऑफर देने का आरोप

– कांग्रेस नेता वीएस उग्रप्पा ने कहा कि उन्होंने (बीजेपी के बीवाई विजेंद्र) ने कांग्रेस एमएलए की पत्नी को फोन किया और कहा कि वे अपने पति से कहें कि येदियुरप्पा के फेवर में वोट करें। हम आपके पति को मंत्री पद या 15 करोड़ रुपए देंगे।

– इससे पहले कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने कहा कि भाजपा को पता है कि उसके पास 104 विधायक हैं, इसके बाद भी वह हर संभव कोशिश कर रही है और हमारे विधायकों को खरीदने के लिए कुछ भी देने को तैयार है। हमारे एमएलए हमारे साथ हैं। दो अभी हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन वे हमें सपोर्ट करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था राज्यपाल का फैसला

– कांग्रेस और जेडीएस की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। इस तरह शीर्ष अदालत ने राज्यपाल वजूभाई वाला के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें उन्होंने बीएस येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया था।

– जस्टिस एके सीकरी, अशोक भूषण और एसए बोबड़े की बेंच ने कहा सबसे बड़ी पार्टी को बुलाना सही या गलत? कोर्ट इसकी सुनवाई को भी तैयार। 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। इस पर 10 हफ्ते बाद होगी सुनवाई।

सबसे कम समय के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा

क्रं. मुख्यमंत्री राजय कार्यकाल
1. बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक 17 से 19 मई 2018 (2 दिन)
2. सतीश प्रसाद सिंह (अंतरिम) बिहार 28 जनवरी से 1 फरवरी 1968 (4 दिन)
3. ओम प्रकाश चौटाला हरियाणा 12 से 17 जुलाई 1990 (5 दिन)
4. बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक 12 से 19 नवंबर 2007 (7 दिन)
5. नीतीश कुमार बिहार 3 से 10 मार्च 2000 (7 दिन)
6. एससी मारक मेघालय 27 फरवरी से 10 मार्च 1998 (11 दिन)
7. ओम प्रकाश चौटला हरियाणा 21 मार्च से 6 अप्रैल 1991 (16 दिन)
8. जानकी रामचंद्रन तमिलनाडु 7 से 30 जनवरी 1988 (23 दिन)
9. बिंदेश्वरी प्रसाद बिहार 1 फरवरी से 2 मार्च 1968 (30 दिन)
10. चौ. मोहम्मद कोया केरल 12 अक्टूबर से 1 दिसंबर 1979 (50 दिन)