बच्चों को अध्यात्म से जोड़ें, उन्हें संस्कृति के बारे में बताएं

वर्तमान में बच्चों के व्यवहार में कुछ बड़े परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। वे अपनी संस्कृति से दूर हो रहे हैं। बड़ों का आदर करने और सामने वाले की बात को सम्मान देने जैसी अच्छी आदतों से वो दूर होते जा रहे हैं।

इसकी बड़ी वजह वीडियोगेम, मोबाइल और इंटरनेट हैं। ऐसा नहीं है कि बच्चों को इन तकनीकों से दूर रखना ही एकमात्र उपाय है, हमें यह देखना चाहिए कि इन चीजों को बच्चों के लिए कैसे उपयोगी बनाया जा सकता है।

बच्चों को हमारी संस्कृति के बारे में जानकारी देना बहुत जरूरी है। संस्कृति भूलने का दुष्परिणाम है कि उनमें बड़ों के प्रति आदरभाव कम होता जा रहा है। हमें चाहिए कि हम बच्चों को अच्छे काम और व्यवहार के लिए प्रेरित करें। समय-समय पर बच्चों को अच्छे व्यवहार के लिए प्रोत्साहित करें। अच्छे व्यवहार के लिए उन्हें शाबाशी दें।

उन्हें अध्यात्म से जोड़ने की कोशिश कर ये बताएं कि वे माता-पिता, गुरु के चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लें और सभी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। बच्चों को प्रेरित करें कि वे हमारे प्राचीन ग्रंथों की तरफ आकर्षित हो सकें। समय-समय पर उन्हें गीता का पाठ कराएं और इसके श्लोकों को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करें।

वर्तमान दौर की एक बड़ी समस्या संयुक्त परिवारों का विघटन भी है। संयुक्त परिवार में बच्चे के साथ माता-पिता के अलावा दादा-दादी, चाचा-चाची भी साथ रहते हैं। ऐसे में बच्चों का विकास अच्छा होता है। उनमें एक-दूसरे के प्रति आदर और सहयोग की भावना विकसित होती है। ऐसे परिवारों के बच्चे अपनी संस्कृति के साथ जल्दी और आसानी से वाकिफ हो जाते हैं। लेकिन बदलती जीवन शैली में अब परिवार का मतलब माता-पिता और बच्चा हो गया है।

आधुनिक जीवनशैली की व्यस्तताओं के चलते माता-पिता के पास इतना समय नहीं होता कि वे बच्चों से संवाद स्थापित करें। एकल परिवारों के बच्चों के व्यवहार में कई दिक्कतें सामने आती हैं। मैं तो पालकों से यही कहूंगा कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार देने का प्रयास करें। उन्हें अध्यात्म से जोड़े। खुद दूसरों से साथ अच्छा व्यवहार करें जो बच्चों के लिए आदर्श प्रस्तुत करें।

-डॉ. मधुकर पवार, प्रिंसिपल, सिका स्कूल नंबर 2