बच्चों को बंधुआ मजदूर बनाकर करवाते थे 16 घंटे काम

8 से 14 साल के 5 बच्चों को महिला एवं बाल विकास और श्रम विभाग की टीम ने शुक्रवार को मुक्त कराया। राजस्थान से आकर शहर में डेरा जमाने वाले गड़रिए इन बच्चों से बंधुआ मजदूर की तरह काम कराते थे। बच्चों से 16-16 घंटे काम कराया जाता था।

बच्चों को न तो माता-पिता से बात करने दी जाती थी न पैसा दिया जाता था। एक बच्चा तो तीन साल से परिवार से मिला तक नहीं था। मुक्त कराए गए बच्चों में से 4 राजस्थान के रहने वाले हैं और एक धार जिले का। सभी को विभागीय संस्था में रखा गया है।

चाइल्ड लाइन को दो दिन पहले सूचना मिली थी कि बायपास क्षेत्र में गड़रियों के डेरे में कुछ बच्चों को बंधुआ मजदूर बनाकर काम कराया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास, श्रम विभाग और चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ता गुरुवार को इन डेरों पर पहुंचे और बच्चों से बात की। बच्चों की उम्र 8 से 14 साल के बीच है।

बच्चों ने बताया कि गड़रियों ने उनके माता-पिता को पैसों का लालच देकर उन्हें अपने साथ रख लिया है। न तो उन्हें पैसे दिए जाते हैं न ही माता-पिता से बात कराई जाती है। बच्चे घर जाने का कहते हैं तो गड़रिए उनके साथ मारपीट करते हैं। एक बच्चे ने बताया कि उसे माता-पिता से बात करे हुए तीन साल हो गए हैं। बच्चों से 16-16 घंटे भेड़ों की रखवाली कराई जाती है।

15-15 दिन नहाने नहीं देते

बच्चों ने चाइल्ड लाइन को बताया कि वे घर जाना चाहते हैं। डेरे वाले उन्हें 15-15 दिन नहाने भी नहीं देते। शुक्रवार शाम करीब 6.30 बजे महिला एवं बाल विकास, चाइल्ड लाइन, श्रम विभाग और एनजीओ जन साहस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और पांचों बच्चों को मुक्त कराया।

बच्चों को विभाग की संस्था में रखा गया है। टीम के साथ विशेष किशोर पुलिस इकाई के सदस्य भी थे। मौके से हरी निवासी राजस्थान नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। शनिवार को बच्चों के बयान लिए जाएंगे। इसके बाद पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज कर सकती है।