बम स्क्वॉड की मशीनें डेढ़ साल से खराब, स्टेशन के 12 में से 10 डोर मेटल डिटेक्टर भी बेकार

रायपुर.राजधानी होने से रायपुर स्टेशन में पैसेंजरों का ट्रैफिक होने के साथ हमेशा वीआईवी मूवमेंट बना रहता है लेकिन इसके बाद भी सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। इस स्टेशन को संवेदनशील की श्रेणी में रखते हुए सुरक्षा के लिए यहां बम निरोधक दस्ता भी तैनात किया गया है। लेकिन पिछले डेढ़ साल से बम को डिटेक्ट करने वाले सभी उपकरण खराब हैं। इतना ही नहीं स्टेशन पर 12 डोर मेटल डिटेक्टर में से 10 बिगड़े हुए हैं, ऐसे में सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे में किस तरह की निगरानी की जा रही है।

राजधानी के स्टेशन से रोजाना 150 ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें 50 हजार से ज्यादा यात्री आते-जाते हैं। सुरक्षा खामियों को लेकर भास्कर ने पड़ताल की तो पाया कि अधिकतर सेफ्टी उपकरणों की वारंटी और कंपनी सर्विस की समयसीमा खत्म हो चुकी है। इन्हें खराब हुए लंबा समय हो गया है, इसके बाद भी कोई सुध नहीं ले रहा है। रेलवे और आरपीएफ के जिम्मेदार कह रहे हैं कि इन उपकरणों को बनवाने में अधिक लागत लग रही हैै। इसे लेकर विभागीय अफसरों के बीच लगातार पत्राचार भी किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हो सका है। इससे यहां बीते कई महीनों से स्टेशन पर बम निरोधक दस्ते ने मॉक ड्रिल तक नहीं किया है। जबकि हाल ही में चांदी की बड़ी खेम दूसरे प्रदेश में बिना बिल के ले जाने का मामला सामने आ चुका है। इसके अलावा लगातार गांजा और अन्य नशीले पदार्थ बड़े पैमाने पर रेल के जरिये ही ले जाया जाता है, जिसे लेकर समय-समय पर पकड़ा जा चुका है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बजट का न होना बताकर पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार

जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि सुरक्षा उपकरणों को बनवाने के लिए रेलवे के पास पर्याप्त बजट ही नहीं है। रायपुर स्टेशन में बम निरोधक दस्ते सहित अन्य सुरक्षा उपकरणों को बनाने में करीब नौ लाख रुपए का खर्च आ रहा है, लेकिन अधिकतम चार लाख रुपए ही खर्च करने का प्रावधान है। बजट की कमी के कारण उपकरणों को सुधरवाने का मामला फंस गया है। ऐसे में पिछले डेढ़ साल से उसे ठीक ही नहीं कराया जा रहा है।

डॉग स्क्वॉड के भरोसे ही हो रही है सुरक्षा
रायपुर स्टेशन में सुरक्षा की जांच के लिए केवल डॉग स्क्वॉड की मदद ली जा रही है। ट्रेन से लेकर स्टेशन परिसर में किसी लगेज और सामान की जांच के लिए ट्रेंड डॉग को तैनात किया जाता है। आरपीएफ अफसरों का कहना है कि वर्तमान में उनके पास तीन ट्रेंड डॉग हैं, जिन्हें समय-समय पर स्टेशन और ट्रेनों की जांच में लगाते हैं। लेकिन लाखों रुपए के उपकरण धूल खा रहे हैं और इसे ठीक करने के बारे में सबके पास गोलमोल जवाब ही मिले। उनका कहना है कि अब विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।

बम को डिटेक्ट करने का अधिकार, डिफ्यूज का नहीं
स्टेशन परिसर में बम या विस्फोटक मिलने पर ट्रेनों की सुरक्षा में तैनात आरपीएफ बम को डिफ्यूज नहीं कर सकता। रेलवे ने बम निरोधक दस्ते को मिलने वाले उपकरण व तकनीक में कटौती कर दी गई है। आरपीएफ के पास अब केवल बम की पहचान व डिटेक्ट करने वाले ही उपकरण होंगे। बम को डिटेक्ट कर उसे डिफ्यूज करने के लिए जिला व लोकल पुलिस सूचित करना होगा।

प्लेटफॉर्म-1 पर जल्द शिफ्ट होंगे दोनों थाने
स्टेशन की सुरक्षा इंतजाम को पुख्ता करने की तैयारी शुरू हो गई है। अभी जीआरपी और आरपीएफ के थाने स्टेशन के बाहरी हिस्से में हैं। इससे लोगों को परेशानी होती है। अब प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर ही दोनों को थानों को शिफ्ट किया जा रहा है।

रायपुर मंडल सुरक्षा आयुक्त अनुराग मीणा ने बताया कि बम निरोधक दस्ते के खराब हुए उपकरण को बनवाने की प्रक्रिया चल रही है। कुछ डोर मेटल डिटेक्टर की बैट्री खराब हो गई है, जिसे जल्द ही बदल दिया जाएगा। स्टेशन और ट्रेनों की जांच के लिए डॉग स्क्वॉड है।