बेजुबान जानवरों का दोस्त है मुंबई पुलिस का हेड कांस्टेबल, करता है ये नेक काम

मुंबई, मिड डे। मुंबई पुलिस के हेड कांस्टेबल प्रमोद निकम आवारा कुत्तों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं है। 54 साल के निकम विक्रोली के टेगौर नगर में रहते हैं और कुत्तों से उनका लगाव इस कदर है कि जैसे ही वो मोटरसाइकिल से अपने घर पहुंचते हैं वैसे ही 35 आवारा कुत्ते उनके सामने हाजिर हो जाते हैं।

जानवरों से करते हैं बेहद प्यार

नैगांव के लोकल आर्मस डिवीजन में तैनात निकम इन आवारा जानवरों की देखभाल करते हैं। जानवरों को बेहद प्यार करने वाले निकम में ये गुण उनके परिवार से आये हैं। उनके माता-पिता भी बेजुबानों से बहुत लगाव रखते थे। निकम ने बताया कि 1992 में उनके जीजा एक महीने का कुत्ते का बच्चा लेकर आये। मगर बहन उसे देखकर डर गई। इसके बाद से उन्होंने ही उसे पाला और तब से ही बेजुबानों से एक रिश्ता सा बन गया। निकम आवारा कुत्तों से प्यार करते हैं और  चाहते हैं कि दूसरे लोग भी इनकी देखभाल करें।

रोज करते हैं खाने का इंतजाम

निकम प्रतिदिन सुबह 6 बजे उठकर इन आवारा कुत्तों के खाने-पीने का इंतजाम करते हैं इसके लिए वह 10-15 लीटर दूध और 2 किलो बिस्किट लाते हैं। कभी-कभी वह इन कुत्तों को चिकन भी खिलाते हैं। पहले तो वह अकेले ही सारा खर्चा करते थे। लेकिन अब और लोग भी इस नेक काम में इसकी मदद करते हैं।

आवारा जानवरों पर हर माह खर्च होते हैं पांच हजार

निकम के इस नेक काम से उनकी पत्नी वनीता भी काफी खुश हैं। वो कहती हैं कि हर माह कुत्तों पर 5 -6 हजार तक खर्चा आता है जिससे बजट थोड़ा बढ़ जाता है लेकिन अब तो ऐसा करते हुए 25 साल हो गए हैं। ऐसे में हम बाहर घूमने और रेस्टोरेंट जाने के खर्चे को बचाकर इन बेजुबान जानवरों के खाने का इंतजाम करते हैं। प्रमोद के बच्चे भी इस काम में मदद करते हैं, वे घायल कुत्ते और बिल्लियों का इलाज करवाते है और उनकी देखभाल भी करते हैं। इस काम में कई बार कुत्ते काट भी लेते हैं लेकिन फिर भी वह निस्वार्थ भाव से इन जानवरों की देखभाल करते हैं।

निकम को पल में पहचान लेते हैं बेजुबान

अपनी 26 साल की पुलिस सर्विस में निकम कई पुलिस थानों में तैनात रहे। आज भी जब वो विक्रोली या साकीनाका थाने पर जाते हैं, तो आवारा कुत्ते उन्हें पहचान जाते हैं। इस आदत से पहले प्रमोद के दोस्त काफी चिढ़ते थे। मगर उनकी देखा-देखी एक दोस्त ने भी आवारा कुत्ते को पाल लिया है।

आर्थिक तंगी के बावजूद निकम के इरादे मजबूत हैं। उनका कहना है अगर आवारा कुत्तों पर हर माह जो पैसा खर्च कर रहा हूं, अगर उसे जमा कर लेता तो आज खुद का एक मकान होता। अब मैं रिटायर होने जा रहा हूं, मगर खुद का घर नही बनवा सका।