भारत में अब टीनेजर्स भी हो रहे नपुंसकता का शिकार, बेहद खतरनाक है इस बीमारी से जुड़ी ये सच्चाई

दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ाने वाली सुनीता अग्रवाल (बदला हुआ नाम)की उम्र 38 साल है और पिछले कुछ महीनों से वो डिप्रेशन यानि अवसाद से ग्रस्त हैं। असल में उनके पति ने इसल‌िए आत्महत्या कर ली क्योंकि उन्हें इस बात का शक था कि वो बच्चे पैदा नहीं कर सकते।

असल में इस हरियाणा में रहने वाले इस जोड़े ने पांच बार आईवीएफ तकनीक की मदद ली ‌थी ताकि उनके बच्चे हो सकें लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। प्राइवेट बैंक में काम करने वाले उनके पति राकेश अग्रवाल (40) ने एक दिन ऑफिस से लौटने के बाद घर में ही फांसी लगा आत्म हत्या कर ली।
आपको जानकर हैरानी होगी कि नेशनल क्राइम ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक केवल 2015 में ही 448 लोगों ने बच्चे पैदा करने की अक्षमता या नपुंसकता के कारण आत्महत्या की है।

बता दें कि इससे ठीक एक साल पहले ही नपुंसकता के शक के चलते 332 लोगों ने आत्महत्या कर अपनी जान दे दी थी। यानि यौन कमजोरी के कारण मरने या आत्महत्या करने वालों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है।

पति की मौत के छह महीने बीत जाने के बाद भी सुनीता खुद को इस सदमें से उबार नहीं पाई हैं। असल में सुनीता और राकेश की 10 साल पहले शादी हुई थी और तब से ही दोनों एक बच्चे के लिए कोशिश कर रहे थे।
शुरु में घरवालों को सुनीता पर शक हुआ। उन्हें लगा कि सुनीता बांझ हैं जिसके चलते उन्हें ससुराल वालों की मानसिक प्रताड़ना भी सहनी पड़ी लेकिन डॉक्टर के पास जाने के बाद पता चला कि उनके पति में ही कमी है।

इसके बाद से ही राकेश डिप्रेशन में रहने लगे। इसके बाद इस दंपत्ति ने डॉक्टर से लेकर ज्योतिषि तक सबके चक्कर लगाए। डॉक्टरों की सलाह पर दोनों ने आईवीएफ ट्रीटमेंट भी कराया जिसमें लाखों रुपये खर्च हुए जिससे परिवार आर्थिक कर्ज में भी डूब गया लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।

सूत्रों के मुताबि हर महीने 40 से 50 लोग नामर्दी या नपुंसकता के शक या इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाते हैं। हैरानी की बात ये है कि इसमें से 20 फिसदी लोगों को मनोचिकित्सक की मदद की जरूरत होती है।