मतदान बहिष्कार के समर्थन में उतरे 50 गांव के लोग

उदयपुर। मावली विधानसभा क्षेत्र के शीशम की घाटी गांव में सिक्सलेन पर अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर मतदान बहिष्कार का आंदोलन पचास गांवों तक फैल चुका है। यह आंदोलन अब मावली, वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र के गांवों में फैल गया है।

रविवार को शीशम की घाटी के आसपास के पचास से अधिक गांवों के जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ नागरिकों की बैठक डबोक में हुई। जिसमें अठारह पंचायतों एवं गांवों के सरपंचों ने आंदोलनकारियों को लिखकर दिया कि वह बैठक में लिए गए निर्णय का पालन करेंगे।

अगले कुछ दिनों में आसपास के और बीस गांवों के प्रतिनिधियों को भी बुलाकर वार्ता की जाएगी। आंदोलन के संचालक डबोक सरपंच शंकरलाल पालीवाल ने बताया कि रविवार को आयोजित बैठक में रेबारियों की ढाणी, गाड़रियों का खेड़ा, गाडवा, गोडवा, आनंदपुरा, रेडिया, तेमोरियों का कुआं, ठीकरिया, सिहाड़ा, कीरों की मगरी,

वकारी मंगरी, आंवलिया, चंगेडी, ओरड़ी, गमेती बस्ती, बेमाला, गोवला, तुलसीदास की सराय एवं इसके आसपास के पचास से अधिक गांवों के जनप्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कहा कि अंडरपास को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जांच कराई तथा इसके लिए बेंगलूरु से विशेष इंजीनियर बुलाए गए थे।

जिन्होंने सात दिन में रिपोर्ट तैयार की थी और उन्होंने ग्रामीणों की मांग जायज ठहराई। इसके बावजूद छह माह बीत गए और हाईवे अथॉरिटी ने शीशम की घाटी की बजाय उससे डेढ़ दो किलोमीटर की दूरी पर जहां एक होटल है, वहां अंडरपास की तैयारी शुरू कर दी है। वह आबादी इलाके से दूर है।

इसका फायदा महज एक होटल मालिक को मिलेगा। जबकि दूसरा अंडरपास एक पेट्रोल पंप के पास दिया है जहां पांच घरों की बस्ती है। बैठक में तुलसीदास की सराय के सरपंच बेणीराम भील का कहना है कि आंदोलन जब तक जारी रहेगा तब तक अंडरपास के आदेश जारी नहीं कर दिए जाते।

सात दिन बाद क्षेत्र के सत्तर गांवों के जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। जिसमें बाकी बीस गांवों के जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्रीय लोगों से मतदान के बहिष्कार के आंदोलन में शामिल करने का आह्वान किया जाएगा।

इधर, महिला जनप्रतिनिधि विजयलक्ष्मी शर्मा का कहना है कि यदि हमें गोलियां खानी पड़ी तो भी अंडरपास बनवाकर रहेंगे। अंडरपास नहीं बनता है तो ना तो वोट डालेंगे और ना ही वोट मांगने वालों को गांवों में घुसने देंगे।