मध्य प्रदेश: पिछड़े आठ जिलों की निगरानी करेंगे पीएम मोदी के केंद्रीय मंत्री-IAS अफसर, विकास पर देंगे जोर

भोपाल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मध्य प्रदेश के पिछड़े आठ जिलों की निगरानी अपने मंत्रियों व अफसरों के जरिए करेंगे। आदिवासी बहुल पिछड़े इन जिलों के लिए पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री और आईएएस अफसरों की टीम बनाकर उन्हें जिम्मेंदारी सौंपी है। इसमें सुषमा स्वराज को विदिशा, नरेंद्र सिंह तोमर को गुना, थावरचंद गहलोत को राजगढ़, प्रकाश जावड़ेकर को बड़वानी-खंडवा, वीरेन्द्र खटिक को दमोह-छतरपुर और एमजे अकबर को सिंगरौली जिले का प्रभारी बनाया गया हैं। मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने इसकी जानकारी प्रदेश योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को दी है।

ये आईएएस अफसर रखेंगे नजर
-केंद्र सरकार ने मंत्रियों के साथ ही मध्य प्रदेश कैडर के दिल्ली में पदस्थ आईएएस अफसरों को भी जिम्मेंदारी सौंपी है। इसमें अनिल जैन को सिंगरोली, प्रवीर कृष्ण को बड़वानी, एसपीएस परिहार को खंडवा, अजय तिर्की को दमोह, शैलेन्द्र सिंह को छतरपुर, संजय सिंह को विदिशा, प्रमोद दास को गुना और राजेश चतुर्वेदी को राजगढ़ जिले का प्रभार सौंपा गया है।

जिलों का दौरा करेंगे केंद्रीय मंत्री व आईएएस
-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों और आईएएस अफसरों को प्रभार के जिलों में दौरे करने को कहा है। टीम केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसी के आधार पर नीति आयोग पिछड़े जिलों की रैकिंग करता है।

मार्च में नीति आयोग ने जारी की थी लिस्ट

-बता दें कि मार्च 2018 में नीति आयोग ने देश के पिछड़ेपन की तस्वीर पेश करते हुए सबसे पिछड़े 101 जिलों की लिस्ट जारी की थी. इस लिस्ट में मध्य प्रदेश के आठ जिले शामिल है। प्रदेश के सिंगरौली जिले को पिछड़ेपन की इस सूची में तीसरा स्थान मिला है। इसके बाद बड़वानी, गुना, विदिशा, खंडवा, छतरपुर, दमोह और राजगढ़ का नंबर आता है।

जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वाह कर रहा हूं : थावरचंद गहलोत
-नीति आयोग ने केंद्रीय मंत्रियों को अपने-अपने प्रदेश के पिछड़े जिलों में विकास कार्य करवाने की जिम्मेदारी दी है। नीति आयोग की इस जिम्मेदारी के बाद भी उन जिलों में किसी तरह के विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। सूबे से केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत को भी प्रदेश के राजगढ़ जिले के विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है, नीति आयोग द्वारा दी गई जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह कर रहे हैं। मीडिया चर्चा में उन्होंने कहा, सभी मंत्री भी अपने जिलों की रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

क्या नकारा हैं शिवराज सरकार के मंत्री-अफसर
-इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट करके तंज कसा है। उन्होंने लिखा, “अमित शाह का पहले प्रदेश में चेहरा आगे कर चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के बाद अब पीएम मोदी का नया क़दम, प्रदेश के 8 पिछड़े जिलों की कमान केंद्रीय मंत्रियो को, स्पष्ट करता है MP में शिवराज और उनकी सरकार के अफ़सर-मंत्री नकारा है..”

ये हैं पिछड़ेपन के कारण
सिंगरौली – सिंगरौली में पिछड़ेपन की बड़ी वजह औद्योगिक विकास न होना। जिले में बारिश कम होना, जिसका असर खेती पर पड़ता है और पैदावार कम होता है। आदिवासियों की संख्या ज्यादा। शिक्षा और स्वास्थ्य के हालात भी बदतर हैं।
बड़वानी – आदिवासी बाहुल्य जिला, स्वास्थ्य सेवाएं बदतर हालत में, सड़कों की हालत खराब है। रोजगार के साधनों का अभाव, जिससे लोगों का पलायन। आजादी के 71 साल बाद भी क्षेत्र में रेल सुविधा नहीं।
विदिशा –प्रदेश की राजधानी से सटा हुआ जिला, और देश की विदेशमंत्री सुषमा स्वराज का क्षेत्र। इसके बावजूद विकास के पैमाने पर काफी पिछड़ा। क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य के हालत बेहद खराब है। जिले में कुपोषण बड़ी समस्या है। यहां पर बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चें कुपोषित पाए गए हैं।

गुना – राजनीतिक रसूख वाला जिला, विकास के पैमाने पर पिछड़ा है। क्षेत्र के पिछड़ने की मुख्य वजह यहां पर रोजगार का अभाव माना जा रहा है। बड़े उद्योग धंधों की दरकार।
खंडवा – खंडवा को नर्मदा की नजदीकी का वरदान मिला है, लेकिन नर्मदा पर बने बड़े बांधों की वजह से देश में दूसरी जगहों में काफी खुशहाली बरसी है और खंडवा के हिस्से विस्थापन की तबाही। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर शिक्षा तक के हालत बदतर है। औद्योगिकरण का अभाव।
दमोह – जिले में सबसे बड़ी समस्या रोजगार की, काम नहीं मिलने से अभाव में क्षेत्र में अपराधों का ग्राफ भी बढ़ा है। ग्रामीण इलाकों में हालत ज्यादा खराब। जहां स्वास्थ्य सेवाएं हैं ही नहीं, या है तो वहां पर सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है। शिक्षा के क्षेत्र में भी हालात खराब।
छतरपुर-बुदेलखंड के इस जिले में सूखे की मार से लोग बेहाल। अरबों की योजनाएं बनती हैं, लेकिन सही तरीके से अमल नहीं होने से कागजों पर बनकर रह जाती हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल। रोजगार के लिए बड़ी संख्या में पलायन को मजबूर हैं।