महिलाओं के लिए दिल्ली से ज्यादा असुरक्षित है मुंबई

मुंबई। महिलाओं के लिए असुरक्षित जगहों के मामले में मुंबई ने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। एक हालिया विश्लेषण में यह बात सामने आई है। इस साल सितंबर में सोशल मीडिया में मीटू कैंपेन के चलने के बाद एक के बाद एक कई महिलाओं ने सामने आकर अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के अनुभवों को साझा किया है।

अभिनेता नाना पाटेकर पर अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद मीटू कैंपेन हैशटैग के साथ सोशल मीडिया में वायरल हो गया था। इसके बाद मीडिया, एडवर्टाइजिंग और एंटरटेनमेंट सेक्टर में काम करने वाले कई ताकतवर लोगों के खिलाफ महिलाओं ने आवाज उठाई।

अमेरिका में पूर्व फिल्म प्रोड्यूसर हार्वे विंस्टीन पर यौन आरोप लगाए जाने के एक साल बाद भारत में यह अभियान शुरू हुआ। मगर, दोनों देशों में शुरू हुए इस अभियान में काफी असमानता है। अमेरिका में मीडिया ने इस मुद्दे को उठाया और बड़े लोगों का पर्दाफाश किया। वहीं, भारत में सोशल मीडिया में महिलाओं ने पहले अपनी आवाज उठाई और इसके बाद मीडिया का ध्यान इस मुद्दे की तरफ गया।

भारत में अमेरिका की तुलना में अज्ञात आरोपियों की संख्या कहीं अधिक है। पूर्व पत्रकार श्रीकांत खांडेलकर की 26 अक्टूबर 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, यौन हमलावरों की उम्र 35 से 44 साल के बीच है। वह बताते हैं कि सोशल मीडिया में कई लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन हमने अपनी रिपोर्ट को मुख्य धारा की मीडिया जैसे समाचार पत्रों, टीवी चैनल्स और प्रमुख वेबसाइट्स में यौन उत्पीड़न की खबरों तक सीमित रखा।

इसके बाद हमने 48 पुरुषों का चार्ट तैयार किया, जिसमें उनके नाम, अनुमानित उम्र, कंपनी, किस तरह का व्यवसाय करते हैं, शहर का नाम शामिल किया और यह पता करने की कोशिश की थी कि यह घटना कब हुई थी। हमने यह अनुमान लगाने की कोशिश भी कि है कि जिस वक्त यह घटना हुई थी, तब आरोपित की अनुमानित उम्र कितनी थी।

खांडेकर निजी रूप से मानते हैं कि एक पीड़ित महिला के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल आखिरी उपाय है। यह केवल तभी होता है, जब वे मानती हैं कि उनकी कंपनी इस मुद्दे को संतोषजनक ढंग से हल नहीं करेंगी। सार्वजनिक रूप से सभी प्रकार के अंतरंग जानकारियों को साझा करना बहुत सुखद नहीं हो सकता है। फिर भी वे इसे करने के लिए मजबूर महसूस करती हैं।

यह केस स्टडी एडवर्टाइंजिंग और मार्केटिंग पोर्टल afaqs में प्रकाशित हुई थी और खांडेकर इसके को-फाउंडर हैं। इसमें खांडेकर ने कहा कि स्टार्ट-अप्स के मालिकों को यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को हाथ से निकल जाने से पहले समाधान करना चाहिए। स्टार्ट-अप्स ऊर्जावान और अनौपचारिक होते हैं। इनमें नियम ढीले होते हैं और अधिकांश नियम समय के साथ बनते हैं।

जब भी शिकायतें होती हैं, तो बंद दरवाजों के पीछे वे ठीक तरह से हल नहीं की जाती हैं। इसलिए मेरा मानना है कि उद्यमियों को इससे एक बात सीखनी चाहिए, उन्हें कानून का पालन करना चाहिए। यदि कंपनियां यह सुनिश्चित नहीं करती हैं तो गंदगी बाहर जाएगी।