महिलाओं पर पैर रखकर चलते रहे दो आदमी, आस्था के नाम पर होता रहा ये सब

रायपुर। गंगरेल मड़ई देखने शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों लोग पहुंचे। मां अंगार मोती देवी के दर्शन कर उन्होंने अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना भी की। संतान प्राप्ति के लिए महिलाओं ने मां अंगार मोती के दरबार में परण भी किया। मड़ई में करीब ४५ गांवों के देवी-देवता शामिल हुए। इस दौरान आंगा देव पारंपरिक बाजे की थाप पर जमकर थिरकते रहे।
जिला मुख्यालय से १४ किमी दूर गंगरेल बांध के किनारे मां अंगार मोती विराजित हैं, जिनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। मान्यता के अनुसार दिवाली के बाद आने वाले पहले शुक्रवार को यहां मड़ई आयोजित होती है। इसके बाद ही अंचल के अन्य गांवों में मड़ई मेले के आयोजन का सिलसिला शुरु होता है। साल की पहली मड़ई होने के कारण यहां शहर समेत गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मड़ई का मुख्य आकर्षण ४५ गांवों से पहुंचने वाले देवी-देवता रहते हैं, जिन्हें विधि-विधान के साथ मां अंगार मोती के दरबार में आमंत्रित किया जाता है। इन देवी-देवताओं के साथ आंगा देवता भी आते हैं। मड़ई में सुबह से देवी दर्शन के लिए भक्तों की भी भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर में शहर से होकर आंगा देवता मड़ई स्थल पर पहुंचे। विभिन्न गांवों से ४५ देवी-देवता मड़ई देखने पहुंचे थे। इनके साथ आए श्रद्धालु बाजे की धुन पर जमकर थिरकते रहे और युवक डांग लेकर उनकी अगुवाई करते रहे। उनकी जगह-जगह पूजा-अर्चना भी की गई।
संतान प्राप्ति की कामना की
मां अंगार मोती मंदिर के मुख्य पुजारी ईश्वर नेताम ने बताया कि गंगरेल में आदिकाल से मड़ई की परंपरा चली आ रही है। दिवाली के बाद प्रथम शुक्रवार को इसका आयोजन किया जाता है, इसलिए शुक्रवार का दिन यहां के लिए विशेष होता है। इस मड़ई के बाद ही अन्य गांवों में मड़ई का आयोजन होता है। मड़ई के अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं संतान की कामना लेकर मां अंगार मोती के दरबार में पहुंचती हैं। वे कामना पूर्ति के लिए बैगाओं से आशीर्वाद लेती हैं। मां की ख्याति दूर-दूर तक है और जो सच्चे मन से मां अंगार मोती की पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।
बांध क्षेत्र में किया सैर-सपाटा
गंगरेल मड़ई में पहुंचे हजारों लोगों ने पूजा अर्चना करने के बाद बांध क्षेत्र में सैर-सपाटा का भी आनंद उठाया। वे घूमकर खूबसूरत नजारों का दीदार करते रहे। गंगरेल बांध में पानी कम होने के बावजूद उसकी खूबसूरती देखते ही बन रही थी। कई लोग टोलियों में पिकनिक का मजा लेने पहुंचे थे। बांध के ऊपर सैकड़ों लोग एक साथ चल रहे थे। बांध के प्रवेश द्वार से अंतिम छोर के गार्डन तक भारी भीड़ रही।
हजारों लोग पहुंचे
गंगरेल मड़ई का आनंद उठाने शहर समेत अन्य जिलों से भी हजारों लोग पहुंचे थे। बच्चों ने गुब्बारे, खिलौने मिठाई का जमकर आनंद लिया। महिलाओं ने श्रृंगार, घर गृहस्थी के सम्मानों की खरीदी की। मेले में मिट्टी के बर्तन, खिलौने, लकड़ी के सामान, मिष्ठान्न आदि की दुकानें बड़ी संख्या में सजी थीं। बच्चे खिलौने खरीदने के लिए मचलते रहे। महिलाओं व बच्चों ने तरह-तरह के झूलों का भी आनंद लिया। सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात थे। सिविल ड्रेस में भी जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी, जो असामाजिक तत्वों और पाकिट मारो पर नजर रख रहे थे। भीड़ को देखते हुए पार्किंग स्थल को मेला क्षेत्र से दूर रखा गया था।
परण में जबर्दस्त आस्था दिखी
परण में करीब ११० से अधिक महिलाएं शामिल हुई। मंदिर के पुजारी उनसे नारियल, नीबू मंगाते रहे। माता के दरबार के सामने लंबी लाईन लगाकर इन महिलाओं को बिठाया गया। मड़ई-मेला में पहुंचे बैगाओं ने डांग, मड़ई, त्रिशूल, संकल, कासड़ आदि के साथ परंपरागत संस्कृति का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने मेला स्थल के तीन चक्कर लगाए और मां अंगार मोती की ओर आने लगे। इस दौरान नीबू, नारियल आदि लेकर बैठी महिलाएं बाल खुलाकर पेट के बल लेट गई और करीब आधा दर्जन बैगा अपने डांग-डोरी के साथ महिलाओं के ऊपर से चलते हुए माता के पास पहुंचे। बैगाओं ने कहा कि पूरा विश्वास है कि आने वाले मेले तक इनकी गोद भर जाएगी।