महिला का MMS बनाना चाहता था ये शख्स, कई लड़कियों से थे संबंध

इंदौर। कविता रैना हत्याकांड में शनिवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश बीके द्विवेदी के समक्ष भंवरकुआं थाने के तत्कालीन और वर्तमान में लसूड़िया थाना प्रभारी राजेंद्र सोनी से सीनियर एडवोकेट यादव ने क्रॉस (प्रति परीक्षण) किए। यादव ने आरोपी की देरी से गिरफ्तारी पर कई सवाल किए। बता दें, आरोपी बुटिक संचालक महेश बैरागी ने कविता से संबंध और उसकी ब्लू फिल्म बनाने में नाकाम रहने पर गुस्से में आकर उसकी हत्या की थी। आरोपी ने शव के 6 टुकड़े कर उसे दो बाेरों में भरकर नाले में फेंक दिया था

कविता के उस दिन गायब होने के पहले की कहानी और अब तक का पूरा घटनाक्रम…

कविता के गायब होने वाले दिन का किया था नाट्यरूपांतरण

– कविता की लाश मिलने के ठीक आठ दिन बाद बुधवार 2 सितंबर 2015 को पुलिस टीम पूरा घटनाक्रम समझने के लिए उस जगह पहुंची, जहां कविता को अंतिम बार देखा गया था। तब एफएसएल एक्सपर्ट डॉ. सुधीर शर्मा और पुलिस अधिकारियों ने घटना का नाट्यरूपांतरण कुछ इस तरह किया था…
– दोपहर एक बजे के करीब एफएसएल एक्सपर्ट डॉ. सुधीर शर्मा पुलिस अधिकारी वीडियोग्राफर के साथ मित्रबंधु नगर और वैभव नगर स्थित उसी कॉर्नर वाले पीपल के पेड़ के पास पहुंचे थे, जहां पर बुजुर्ग महिला और कॉलेज छात्रा ने उसे अंतिम बार देखा था।
– इसके बाद दो महिला कॉन्स्टेबल एक सफेद रंग की एक्टिवा लेकर पहुंचीं। तब बुजुर्ग महिला उसी ओर आगे बढ़ी, जहां से उसने उस दिन कविता को आखिरी बार देखा था।
– इसी दौरान कॉलेज छात्रा, जो कविता का किरदार निभा रही थी, सफेद एक्टिवा लेकर आती हुई दिखाई दी। इसी दौरान डॉ. शर्मा ने महिला को इशारा किया कि जहां उन्होंने कविता को एक्टिवा से देखा था छात्रा को वहीं पर रुकने के लिए कहे।
– करीब 50 मिनट तक रीटेक पर रीटेक होते रहे। पुलिस को इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन से चार घंटे लगे।
… और ऐसे हुआ महेश पर शक
– पुलिस के सामने आरोपी महेश का नाम कविता के पति संजय ने पहले ही दिन लिया था। पुलिस ने महेश की जानकारी निकाली तो पता चला उसके खिलाफ 2013 में ब्लू फिल्म बनाने और 2014 में धमकी का केस दर्ज है। संजय के कई लड़कियों से संबंध रहे हैं।
– उसने कविता को टारगेट करने के लिए ही बुटिक के सामने 20 अगस्त को साड़ी की दुकान खोली थी। यह दुकान उसने 8 दिन बाद बंद कर दी थी। महेश उस दुकान पर सीसीटीवी कैमरे के फुटेज लेने गया था, जहां पुलिस पंहुची थी।
– पुलिस तब से तीन बार महेश को हिरासत में ले चुकी थी। महेश की एक किडनी खराब बताई जाती है। इसके चलते पुलिस उससे घटनास्थल की जानकारी नहीं उगलवा पा रही थी।
– पुलिस ने योजना के तहत पिछले दिनों उसे छोड़ा और गतिविधियों पर नजर रखी। पता चला वह टीकम नाम के शख्स के फ्लैट पर लड़कियों को ले जाता है, तब वहां छापा मारा गया। यहां से पुलिस को टाइल्स में खून और टांट पर चाकू मिल गया। हत्या के बाद महेश ने अपने व कविता के कपड़े जला दिए थे।

– मामले के खुलासे के लिए कविता से जुड़े 177 लोगों को शक के दायरे में रखा गया और उनसे लगातार पूछताछ की गई। इनमें दूध व सब्जी वाले, प्लम्बर, ठेकेदार, दोस्त और मिलने वाले थे। शहर में हर उस स्थान को चिह्नित किया, जहां कविता पिछले 10 साल से जा रही थी। इनमें रिश्तेदार के घर, दुकानें, बाजार, बच्चों के स्कूल तक को शामिल किया।
– कविता की दोस्ती और दुश्मनी के हर बिंदु पर की जांच। नौलखा बस स्टैंड की पार्किंग से बरामद कविता की एक्टिवा में मिले पेट्रोल की मात्रा को लेकर भी जांच की। पड़ताल की कि वह कितने लीटर पेट्रोल में कहां तक घूमी होगी? उन इलाकों के अंतिम पाइंटों पर जाकर चेकिंग की।- पूरे घटनास्थल का रेडियस 10 किलोमीटर का था। इस दायरे में बिंदुवार घटनास्थलों पर पहुंचकर जांच की और साक्ष्य जुटाए। 100 लोग आरोपी के रूप में ट्रेस किए। पुलिस को महेश की गतिविधियाें पर शंका हुई और अंतत: उसे गिरफ्तार कर लिया गया।