महिला क्रिकेट विश्वकपः भारतीय टीम को भारी पड़ गईं ये 5 गलतियां

नई दिल्लीः रविवार को लॉर्ड्स में खेले गए महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में भारतीय टीम 9 रन से हार गई और इंग्लैंड की टीम चौथी बार वुमन्स वर्ल्ड कप चैम्पियन बनी. बेहद करीबी मुकाबले में मिली हार के साथ ही भारतीय महिला टीम 34 साल बाद एक बार फिर लॉर्ड्स के मैदान पर इतिहास बनाने से चूक गई. भारत की पुरुष टीम ने 1983 में इसी ग्राउंड पर वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप जीता था. महिला विश्व के कप के फाइनल मुकाबले में एक वक्त पर मैच टीम इंडिया की मुट्ठी मे लग रहा था, लेकिन फिर सबकुछ बदल गया. इस मैच में भारतीय टीम ने क्या गलतियां कीं, जिनकी वजह से हम खिताब से चूक गए. आइए जानते हैं…

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– मिताली राज का लापरवाही से विकेट गंवाना

– स्मृति मंधाना का बिना खाता खोले आउट होना

– स्काइवर (इंग्लैंड खिलाड़ी) को जीवनदान देना

इंडियन प्लेयर्स की खराब फील्डिंग

मध्यक्रम का खराब प्रदर्शन (28 रन में गंवाए 7 विकेट)

टीम इंडिया की हार की सबसे बड़ी वजह मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों को पूरी तरह फ्लॉप रहना रहा. इस मैच में हार का प्रमुख कारण हो सकता है. एक वक्त पर भारत का स्कोर 42.4 ओवर में 3 विकेट पर 191 रन था और टीम काफी मजबूत स्थिति में दिख रही थी. लेकिन 28 रन के अंदर बाकी की सातों प्लेयर पवेलियन लौट गईं. इन सात में से तीन बल्लेबाज तो खाता भी नहीं खोल सकीं.

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पुच्छल्ले बल्लेबाजों के हाथ से निकली जीत

भारत को आखिरी 18 बॉल पर भारत को जीत के लिए 14 रन बनाने थे और 3 विकेट हाथ में थे. इस वक्त बल्लेबाजों को सिंगल्स लेते स्ट्राइक रोटेट करने की जरूरत थी. लेकिन हुआ इसका उल्टा. टीम इंडिया की टैलेंडर्स क्रूशियल लेवल पर पैशेंस नहीं रख सकीं. आखिरी ओवरों में सिंगल्स लेकर भी मैच आराम से जीता जा सकता था. लेकिन जीत के बेहद नजदीक पहुंचकर उन्होंने हड़बड़ी में अपने विकेट गंवा दिए.

10 में से 5 बल्लेबाजों ने ही डबल डिजिट में रन बनाएं

भारत के खराब बैटिंग को इसी बात से समझा जा सकता है कि दस में से पांच बैट्समैन ही डबल डिजिट में रन बना सकीं. बाकी पांच प्लेयर ने मिलकर केवल 5 रन ही बनाए.

आपको बता दें कि ये दूसरा मौका है जब भारतीय टीम महिला विश्वकप फाइनल में पहुंचकर हारी है, इससे पहले साल 2005 वर्ल्ड कप के फाइनल में वो ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार गई थी.