मेडिकल कॉलेजों में 5 साल के लिए नियुक्त होंगे डीन, शासन को देना होगा ये वचन

भोपाल, । प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन के पद पर अब सीधी भर्ती होगी। इन्हें पांच साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर रखा जाएगा। डीन बनने के बाद सबसे बड़ी शर्त यह है कि निजी प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। साथ ही वचन देना होगा कि शासन के निर्देश जारी होने के बाद डीन की अनुमति के बिना किसी नर्सिंग होम में सेवा नहीं दी है।

-जीएमसी भोपाल में डीन की सीधी भर्ती के लिए शनिवार को विज्ञापन जारी किया गया । स्वाशासी समिति की कार्यकारिणी सभा के अध्यक्ष व संभागायुक्त कार्यालय से यह भर्ती की जाएगी। इसके पहले ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज में डीन की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हो चुका है।

-इस पद पर पहली बार सीधी भर्ती की जा रही है। इसमें किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में 10 साल के शैक्षणिक अनुभव रखने वाले को मौका दिया जाएगा। इसमें पांच साल एचओडी के तौर पर अनुभव होना चाहिए। शासन ने पहली बार डीन के पद के लिए प्रैक्टिस नहीं करने की शर्त रखी है।

-भोपाल में डीन पद के लिए 15-20 दावेदर हैं, लेकिन प्रैक्टिस नहीं करने की शर्त के बाद आधे से ज्यादा के आवेदन करने पर असमंजस है। डीन पद के लिए आवेदन 7 दिसंबर तक मंगाए गए हैं। 10 दिसंबर को साक्षात्कार होंगे। अभी जीएमसी के डीन पद का प्रभार डॉ. एमसी सोनगरा के पास है। वे करीब दो साल से इस पद पर हैं।

ग्वालियर और जीएमसी भोपाल के लिए अलग-अलग मापदंड, विरोध

ग्वालियर में डीन पद के लिए जारी विज्ञापन में यह शर्त भी रखी गई हैं कि आवेदक के खिलाफ लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या विभाग में चांच लंबित नहीं होनी चाहिए। जीएमसी में यह शर्त नहीं रखी गई है। इसी तरह ग्वालियर के विज्ञापन में ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है जो किसी सेमिनार में आयोजक रहे हों, किसी राष्ट्रीय संस्थान से विषय विशेष में डिप्लोमा या ट्रेनिंग की हो। अस्पताल अधीक्षक पद पर काम के अनुभव को दोनों जगह प्राथमिकता दी जाएगी। सरकारी कॉलेज होने के बाद भी अलग-अलग विज्ञापन को लेकर अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं। जीएमसी में कुछ दावेदारों ने कहा कि लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या विभागीय जांच नहीं होने की शर्त यहां क्यों नहीं है।