मैटेरियलिस्टिक अप्रोच-2 (कक्षा 6-8 के लिए ) : घमंड हो गया चूर

राहुल को अपनी क्लास में पढ़ने वाला शफीक पसंद नहीं था। शफीक के बारे में दूसरे लड़के कहते कि उसका दाखिला किसी खास कोटे के तहत हुआ है। कोटे से दाखिल हुए छात्रों के साथ अन्य छात्र ज्यादा बातचीत नहीं करते। कोटे से दाखिल हुए छात्र रवि, महेश और शफीक भी अपनेआप में ही मगन रहा करते। दरअसल,उनके स्कूल को शहर का सबसे महंगा स्कूल माना जाता था।

विद्यार्थियों के बीच अमीर-गरीब की एक खाई भी दिखती थी। शफीक अमीर लड़कों की हैसियत देखकर नहीं, बल्कि उनकी बातों से जरूर प्रभावित हो जाता। कभी-कभी वह सोचता कि जब सभी एक साथ एक ही क्लास में पढ़ते हैं, तो उनके ग्रुप के लड़कों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जाता है?

उसके बाबा फलों का ठेला लगाते हैं, इसलिए? मगर उसी ठेले से तो राहुल, रंजन या असलम के घरवाले भी फल खरीदते हैं। स्कूल से घर तक की यात्रा क्या वे अपने -आप कर लेते हैं? बस, कार या रिक्शा चालक भैया से तो उन लोगों को मदद लेनी ही पड़ती होगी।

महेश के भी पिता नहीं थे, इसलिए घर चलाने के लिए उसके दादा जी चाय की दुकान चलाते थे। रवि के पिता भी कोई छोटा-मोटा काम करते थे। इन तीनों में एक ही समानता थी। इन तीनों का एडमिशन शहर के सबसे महंगे स्कूल में सिर्फ योग्यता के आधार पर हुआ था।

राहुल इन तीनों से बहुत चिढ़ता था। तीनों उसे अपने बराबर नहीं लगते थे, क्योंकि तीनों पैसेवाले नहीं थे। हालांकि शफीक की आंखों में उसने हमेशा अपने लिए दोस्ती का ही भाव देखा। बाकी दो लड़के तो राहुल के रौब- दाब से सहम जाते। राहुल पढ़ाई में अच्छा था।

वह अपने स्कूल में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाला लड़का था। भाषण प्रतियोगिताओं में भी वह आगे रहता। इन दिनों शफीक उसे हर क्षेत्र में टक्कर दे रहा था। यह बात राहुल को अच्छी नहीं लगती। उसे हमेशा लगता कि शफीक जैसे लोग दोस्ती और भरोसे के काबिल नहीं होते। ऐसे लोगो से संबंध नहीं रखे जा सकते। संबंध बराबर वालों से ही बनाया जाना चाहिए।

उनके दिन ऐसे ही खट्टे-मीठे बीत रहे थे। एक दिन कुछ ऐसी घटना हो गई, जिसने राहुल को की आंखें खोल दी। एक दिन राहुल स्कूल से घर लौटा, तो वहां पूरा माहौल बदला हुआ लग रहा था। घर के बाहर भीड़ लगी हुई थी। वहां जाकर सारा माजरा समझ में आया। अभी-अभी पुलिस दो चोरों को पकड़कर ले गई। राहुल की मां दोपहर में बाजार तक गई थीं।

दोपहर का सन्नाटा देखकर दो चोरों ने राहुल के घर का ताला तोड़ा और अंदर दाखिल होने ही जा रहे थे कि उधर से गुजरते हुए शफीक के पिता ने चोरों को देख लिया। फलों का ठेला सड़क पर ही छोड़कर कर उन्होंने दूसरे ठेले वालों को बुलाया और सभी ने मिलकर चोरों को दबोच लिया। दबोचने से पहले शफीक के पिता ने 100 नंबर पर फोन मिला कर चोरों के बारे में पुलिस को भी सूचना दे दी।

इसी वजह से पुलिस भी मौके पर जल्दी पहुंच गई। शफीक के पिता के कंधे पर एक चोर ने चाकू से वार मैटेरियलिस्टिक अप्रोच-2 (कक्षा 6-8 के लिए ) भी कर दिया। वे दर्द से कराह रहे थे, लेकिन राहुल के पिता के आने तक वहां डटे रहे। राहुल बहुत शर्मिंदा था। उसे खुद पर शर्म आ रही थी। उसने अपनी हैसियत के घमंड में चूर होकर जिन लोगों को दुखी किया, उन्होंने ही उसके घर को बचाया।

अन्यथा कोई भी बड़ी घटना घट सकती थी। मां को अकेला देखकर चोर मां पर हमला भी कर सकते थे। इन लोगों ने न सिर्फ घर लुटने से बचाया, बल्कि मां और घरेलू हेल्पर की जान भी बचा ली। राहुल की मां शफीक के पिता और उनके साथी को हाथ जोड़कर बार-बार धन्यवाद कह रही थीं।

वे कह रही थीं, ‘जिन लोगों से मुझे उम्मीद थी कि वे काम आएंगे, वे लोग अपने-अपने घरों में बैठे रहे और जिन लोगों से मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी, उन्होंने आज मेरे लिए इतना कुछ किया!” राहुल मन ही मन लज्जित हो उठा। उसे अपनी सोच पर बहुत शर्म आई।

जिनसे दूर भागता था, वे लोग कितने सहयोगी, कितने ईमानदार निकले। उसे शफीक की आंखें याद आ गईं, जिनमें हमेशा दोस्ती का आमंत्रण दिखता था। आज उसे पता चल गया कि अमीरगरीब में कोई भेद नहीं होता। शफीक के पिता के गले लग गया राहुल। अगले दिन स्कूल में उसे तीन नए दोस्तों को भी गले लगाना था।

– गीताश्री

बच्चों में लेने की बजाय देने की आदत विकसित करें। देने की प्रवृत्ति भौतिकवाद यानी मैटेरियलिज्म के प्रति विशेष लगाव को खत्म करता है। बच्चों के सामने अभावग्रस्त लोगों की आर्थिक मदद अवश्य करें, ताकि उनमें भी ऐसा करने का भाव विकसित हो। दीपावली या क्रिसमस जैसे त्योहार पर उन्हें भी जरूरतमंदों को एक या दो गिफ्ट देने के लिए अवश्य प्रेरित करें, ताकि वे भी देने की खुशी और संतुष्टि के भाव को महसूस कर सकें। अपनी चीजों को दूसरे लोगों के साथ शेयर करना सिखाएं। गैजेट्स में व्यस्त रहने की बजाय वे आपसे बातें करें, ताकि आप जान पाएं कि उनके दिमाग में किस तरह की बातें चल रही हैं। – सोनिया पुआर, मनोचिकित्सक

अभ्यास प्रश्न

– राहुल गरीब लोगों से दोस्ती क्यों नहीं करना चाहता था?

– शफीक के पिता ने राहुल की किस तरह मदद की?

– राहुल क्यों लज्जित हो गया?