मोर्गन स्टैनले ने कहा- तेल की बढ़ती कीमतों को सहन करने में वैश्विक अर्थव्यवस्था सक्षम

अतंरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर भारत समेत कई देश परेशान हैं। लेकिन मार्गन स्टेनले का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इसे सहन करने में सक्षम है। उसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतें सकल वैश्विक ग्रोथ के लिए खतरा नहीं है, क्योंकि कीमतों में वृद्धि काफी हद तक मजबूत मांग की स्थिति से प्रेरित है।

तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद निवेशकों के बीच ये अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या वैश्विक विकास के लिए यह नकारात्मक जोखिम है, लेकिन मोर्गन स्टेनले के चीफ ग्लोबल इकोनॉमिस्ट चेतन आह्या का मानना है कि इसका उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि वृद्धि मांग या आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण बदलाव से प्रेरित है या नहीं। वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी के मुताबिक तेल में जो मौजूदा वृद्धि हो रही है वो उस पृष्ठभूमि के खिलाफ है जहां ग्लोबल ग्रोथ सुधार हो रहा है और वो बीती पांच तिमाहियों में ट्रेंड से ऊपर है।

आह्या ने अपनी एक रिसर्च नोट में कहा, “तेल की मांग और कीमतों में अनुमानित वृद्धि को लेकर, हमने गणना की है कि वैश्विक तेल भार साल 2018 में वैश्विक जीडीपी का 3.1 फीसद रहेगा, जो कि साल 2017 के दौरान 2.4 फीसद रहा था।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था तेल की बढ़ती कीमतों को सहन करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।

मोर्गन स्टेनले के ग्लोबल ऑयल स्ट्रेटजिस्ट मार्टिन रेट्स को उम्मीद है कि साल 2019 की चौथी तिमाही में तेल की कीमतें (ब्रेंट क्रूड) धीरे-धीरे बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल तक हो जाएंगी।