मौत के मुंह से निकलकर आया ये बच्चा, झलक पाने हॉस्पिटल में भीड़ लगी, लोग ले रहे सेल्फी

देवास (मध्यप्रदेश).देवास जिले में खुले बोर 35 घंटे बाद निकला चार साल का रोशन पूरी तरह से हेल्थी है। अभी हॉस्पिटल में एडमिट है। जहां सोमवार को लोगों ने उसके पसंदीदा खिलौना ट्रैक्टर गिफ्ट किया। इससे वह दिनभर खेलता, मुस्कुराता रहा। कुछ दिनों में उसकी छुट्टी हो जाएगी। अस्पताल में रोशन की एक झलक पाने और मिलने के लिए हॉस्पिटल में भीड़ लगी रही। वहीं लोगों ने उसके साथ सेल्फी खिंचवाई। गिफ्ट देकर लंबी उम्र की प्रार्थना की। नजर न लगे इसलिए मां ने लगाया काजल…

– सोमवार सुबह से ही खातेगांव अस्पताल में रोशन से मिलने लोग उमड़ने लगे। दोपहर तक 400 से ज्यादा लोग आ चुके थे। महिलाओं ने सलाह दी कि लोग इतना प्यार कर रहे हैं कि कहीं रोशन को नजर न जाए। इस पर मां ने तुरंत उसकी आंखों में काजल लगाया।

बोरवेल से निकलने के बाद एकटक देखता रहा रोशन

– मां ने बताया खेत पर चने बीनने गई थी। साथ में तीन-चार महिलाएं साथ थीं। पति अन्य जगह मजदूरी पर गए हुए थे। मैंने तीन बच्चों को खेत के पास पेड़ के नीचे खेलने के लिए छोड़ा था। यह खेलते-खेलते पता चला भय्या रोशन गड्ढे में गिर गया।

– मैंने और साथी महिलाओं ने हमारे पास जो रस्सी डाली और अंदर पहुंचाने की कोशिश की पर हम सफल नहीं हुए। तब रोशन के पापा को बुलवाकर बताया, गांव में जानकारी दी। दोपहर 12 बजे बाद सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी आ गए और मुझे वहां से अलग जगह रहने का कह दिया। तब गांववालों ने ही मुझे समझाया कि जब ऐसी घटना होती है तो सरकारी लोग आकर बचाते हैं।

– जब अगले दिन में बोर में फंसे रोशन से पहली बार बात करने गई तो खुदाई के ढेर, भीड़, सेना, मशीनें, पुलिस को देखकर लगा कि अब मेरे बेटे को कुछ नहीं होगा। मुझे एक प्रतिशत भी यह आशंका नहीं रही कि मेरा बेटा वापस मेरे पास नहीं आएगा।

– जब बेटे से बात की तो वह रो रहा था और यह मैं सह नहीं पाई इसलिए तुरंत वहां से हट गई थी। जब रात को एम्बुलेंस में मुझे बैठाया गया और जैसे ही रोशन को लेकर डॉक्टर अंदर आए तो रोशन मुझे देखते ही लिपट गया और अस्पताल जाने तक एकटक मुझे ही देखता रहा..।

एसडीएम उठाएंगे पढ़ाई का खर्च

– खातेगांव एसडीएम ने रोशन की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का फैसला किया है। रजक पूर्व से ही उनके विदिशा के पूर्व ड्राइवर की बेटी राधा कुशवाह और कक्षा चौथी की कंचन सेन का खर्च वहन कर रहे हैं।

बचाव कार्य में 8 लाख रु. से ज्यादा खर्च
– करीब 35 घंटे तक चले बचाव कार्य में सरकार, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवकों के करीब आठ लाख रुपए से अधिक खर्च हुए हैं।

– आधिकारिक तौर पर जेसीबी, पोकलेन के लिए किसी तरह का बिल अभी पेश नहीं किए जाने की बात कही गई है। पोकलेन प्रति घंटे करीब 2500 रु. और जेसीबी 800 रु. के रेट से उपलब्ध होती है