मौसम की मार से किसानो को साढ़े पांच करोड़ का फटका

किसानों के लिए बुरी खबर है। लगभग एक दशक बाद मौसम के साथ नहीं देने से इस बार लोगों को गेहूं खरीदने के लिए अच्छी खासी रकम खर्च करनी पड़ेगी।  वजह इस बार दिसम्बर व जनवरी माह में सर्दी नहीं पडऩे से गेहूं की फसल चौपट होने की कगार पर है। सुबह व शाम को सर्दी के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आ रही है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो इस बार मौसम की चाल ऐसी ही रही तो उत्पादन में 40 फीसदी तक गिरावट आ सकती है।

नहीं मिला तापमान
गेहूं की फसल को सर्दी और धुंध का वातावरण चाहिए। आमतौर पर दिसम्बर माह के अंतिम पखवाडे से जनवरी माह के प्रथम पखवाडे तक वातावरण में कोहरा छाया रहता है, लेकिन इस बार न्यूनतम तापमान भले ही शून्य से नीचे चला गया हो, लेकिन  धुंध व ओस नहीं मिलने से गेहूं की फसल बढ़वार नहीं ले पाई।
कृषि विशेषज्ञ सुंडाराम वर्मा ने बताया कि यह मौसम गेहूं की फसल के लिए हानिकारक है। दिसम्बर व जनवरी माह में कोहरे की चादर से गेहूं की फसल ढ़की रहती है। जब कोहरा व सर्दी नहीं मिली तो निश्चित ही उत्पादन में गिरावट आती है। और किसान को भी खुद के लिए गेहूं की खरीद करनी पड़ जाएगी। अनूकुल मौसम नहीं मिलने से अब तक करीब पांच करोड 40 लाख रुपए के गेहूं का नुकसान हो चुका है
गिर गई उत्पादकता
गेहूं की  फसल 110 से 120 दिन में तैयार हो जाती है। जनवरी माह गेहूं की बढ़वार और बालियां निकलनी शुरू हो जाती है।  कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिले में आमतौर पर गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 40 क्विंटल तक हो जाता है। लेकिन इस बार तो उत्पादन महज 25 से 30 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होने के आसार बन गए हैं। करीब नब्बे हजार हेक्टेयर में बोए गए गेहूं की 40 फीसदी फसल मौसम की भेंट चढ़ चुकी है। जबकि 60 फीसदी फसल बची है जिसका भी गुणवत्ता परक उत्पादन नहीं मिलेगा।

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