यहां दूसरी शादी के लिए यूं तैयार की जाती हैं लड़कियां, निभाई जाती है एक रस्म

रायपुर।छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज अपने रहन-सहन और अजब-गजब मान्यताओं के चलते काफी फेमस है। ये इस राज्य को एक अलग पहचान देते हैं। भले ही आज पढ़े-लिखे समाज में विधवा विवाह का प्रचलन मान्य हो गया हो, लेकिन ये व्यवस्था इस आदिवासी कम्यूनिटी में वर्षों पहले से चली आ रही है। लड़की को यहां विधवा नहीं रखा जाता है बल्कि दूसरी शादी कर दी जाती है। इसके लिए उन्हें एक पवित्र होने की रस्म से गुजरना पड़ता है। जानिए क्या है इस समाज की मान्यता…
छत्तीसगढ़ 1 नवंबर को अपना स्थापना दिवस सेलिब्रेट करने जा रहा है। 
– छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहने वाले बैगा जनजाति दूसरी जनजातियों और समुदाय के लोगों से ज्यादा मिलना-जुलना पसंद नहीं करते हैं।
– ये समाज अपनी अनोखी परंपराओं के कारण जाना जाता है। बैगा अपने परिवार में किसी की मौत के बाद अपना घर छोड़ देते हैं। इसके बाद ये लोग अपने लिए कहीं और नया घर बनाने नई जगह तलाशते हैं।
– बैगा नाम की यह जनजाति नई जगह और नए घर में एक बार फिर से अपनी दुनिया बसाते हैं और नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत करते हैं। बैगा जनजाति मुख्य रूप से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के जंगलों में रहती है।
– बैगाओं की मान्यता है कि परिवार के किसी भी व्यक्ति की मौत होने के पीछे कुल देवता का नाराज होना है। आगे जाकर कुल देवता की नाराजगी परिवार के किसी दूसरे मैंबर को न झेलना पड़े, इसलिए यह जनजाति पुराने मकान में रहना छोड़कर दूसरा ठिकाना तलाशती है।
– दक्षिण बस्तर के कटेकल्याण क्षेत्र के अलावा पखनार, बास्तानार, अलनार, छिंदबहार, तथा चंद्रगिरी आदि इलाकों में रहने वाले आदिवासियों में यह अजीबो-गरीब परंपरा कई सालों से चली आ रही हैं।
गर्म पानी डालकर करते हैं पवित्र
– बैगा समाज में महिलाओं को बहुत सम्मान दिया जाता है। लड़के-लड़कियों को प्रेम विवाह की आजादी दी जाती है।
– लड़कियां खुद अपना जीवनसाथी चुनती हैं। इनमें शादी से पहले संबंध बनाने पर रोक नहीं है।
– शारीरिक संबंध बनाने की बात माता-पिता या पंचों को पता चलती है, इसके बाद शादी कर दी जाती है।
– इस जनजाति की लड़की अगर दूसरा विवाह करना चाहे, तो उस पर एक लोटा गर्म पानी डालकर पवित्र कर दिया जाता है।
– लड़कियां अपने पसंद के लड़के के घर में जाकर उससे शादी करने की बात भी बता सकती हैं। इनमें पूर्णविवाह और विधवा विवाह भी आम है।
– बैगा समाज में बहुपत्नी रखने का रिवाज है। लड़की अपनी मर्जी से दूसरा विवाह कर सकती है।
– विधवा विवाह में देवर का पहला अधिकार होता है, लेकिन अगर विधवा किसी और के नाम की चूड़ी पहने तो उससे शादी करने के लिए स्वतंत्र है।