युवा पीढ़ी, ज्यादा कॉन्फिडेंस या कन्फ्यूज्ड

मिलेनियल्स यानी आज की जनरेशन की अगर हम बात करें तो यह कहना जरा भी गलत नहीं होगा की यह जनरेशन नई सोच रखने वाली है, जो जोश एवं ऊर्जा से भरपूर है, जिन्हें कोई भी पाबंदी या बंदिशे नहीं रोक सकती। आज के युवाओं की सोच आजाद है और शायद यही वजह कि है वो सब कुछ अपने हिसाब से करते हैं, बिंदास करते हैं और बिना कल की चिंता किए करते हैं।

अब चाहे उनका करियर चॉइस हो या लाइफस्टाइल, चाहे ट्रेडिशन को समझना हो या फॉलो करना, ये सब अपनी मर्जी से करते हैं और वो उसमें खुश भी हैं। जो इक्कीसवीं सदी के युवा हैं, वे अपनी लाइफ को लेकर काफी सजग और सुलझे हुए हैं, उन्हें अच्छे से पता है कि लाइफ में कैसे बैलेंस बना कर चलना है।

आज के युवा किसी भी बात का ज्यादा स्ट्रैस नहीं लेते क्योंकि उन्हें खुद पर कॉन्फिडेंस है। आज के समय में हमारे पास कई ऐसे उदहारण हैं जिन्होंने अपने दिल की सुनीं और वही किया जो उन्हें सही लगा। आज वे संतुष्ट हैं और दूसरों को मोटीवेट करते हैं। जैसे: रितेश अग्रवाल युवा पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बन गए हैं।

21 वर्ष के रितेश अग्रवाल, जो ओयो रूम्स के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, इन्होंने इतनी कम उम्र में ऐसा काम कर दिया कि वे अब न केवल उद्यमियों के लिए बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।

इनके जैसे कॉलेज ड्राप-आउट्स आज के युवाओं के रोल मॉडल हैं और यह सोचने पर मजबूर करते हैं की सक्सेसफुल होने के लिए सिर्फ पढाई लिखाई जरुरी नहीं, जरुरी है खुद पर भरोसा और यकीन।

हमारे पास कई और ऐसे कॉलेज ड्रॉप-आउट्स के उदहारण हैं जिन्होंने भारत में स्टार्टअप इंडस्ट्री को एक नई पहचान दी है और युवा उद्यमी बनकर ये साबित किया है की अगर हौसले बुलंद हों तो कामयाबी अपने आप आपके कदम चूमेगी।

वरुण शूर, कैलाश काटकर, दीपक रवींद्रन, रितेश अग्रवाल, कुणाल शाह, महेश मूर्ति, अजहर इकबाल, राहुल यादव, यह कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने एक उदाहरण सेट किया है कि अगर आपको कामयाब होना है तो आप को लकीर से हटकर सोचना होगा, थोड़ा रिस्क भी लेना होगा और सही समय पर सही निर्णय लेना होगा। तब जा कर आप अपने सपने को साकार कर पाएंगे।

बड़ी कंपनियां भी ऐसी ही सोच को पंख देती दिखाई देती हैं। मिसाल के तौर पर स्मार्टफोन्स निर्माता कोमिओ मोबाइल, जो अपने प्रचार और प्रसार को युवाओं की नयी सोच से जोड़ते हैं। यही कारण है कि उन्होंने ब्रांड अंबेसेडर के तौर पर किसी फेमस सेलेब को न लेकर इंटरनेट स्टार्स को लिया है।

उनके फोन्स युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। ये कंपनी लड़कियों को समान अधिकार देने की बात करती हैं, तो साथ ही इंटरनेट और मोबाइल पर वक्त बिताने को कंस्ट्रक्टिव भी मानती हैं।

उनके अनुसार अगर लड़का रात को बाहर जा सकता है तो लड़की क्यों नहीं, इसमें कोई बुराई नहीं है। ये मानते हैं की आज का युग टैलेंट का युग है किताबी ज्ञान या डिग्री का नहीं। केवल पढ़ाई लिखाई से ही सक्सेसफुल होना मुमकिन है, ये ऐसी सोच को दरकिनार करते हैं।

आज के युवाओं ने भी यह साबित किया है की जरूरी नहीं है की सिर्फ पढाई लिखाई से ही आगे बढ़ा जा सके। आज आपको किसी ‘ब्रेक’ की भी जरूरत नहीं है आपका फोन ही आपका मौका है, और उसी को इस्तेमाल कर आप अपने टैलेंट को देश और दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।

अपने लाखों फैंस बना सकते हैं, प्रसिद्धि पा सकते हैं और पैसे भी कमा सकते हैं। कोमिओ मोबाइल ने अपने स्मार्टफोन्स के जरिये यूथ को एक बहुत ही स्ट्रांग मैसेज दिया है की बस अपने दिल की सुनो, आगे बढ़ो और करो।

ऐसे ही युवाओं की सोच को एक मंच देने की कोशिश की है अमर उजाला ने जहां युवा अपनी सोच को दुनिया को बता सकते हैं। आज का युवा सच में क्या सोचता है ये जानने के लिए हम ला रहे हैं “खुल कर बोल” ओपिनियन पोल, जहां युवाओं से पूछे जाएंगे कुछ सवाल, जिनका जवाब युवा अपनी पसंद से दे सकते हैं।