यूरोप से मैडल लेने आई कोटा की बेटी

कोटा.  हमारे देश में शोध को आखिरी क्षणों तक गोपनीय रखने की कोशिश की जाती है, लेकिन यूरोप में माहौल इसके बिल्कुल उलट है। वहां शोध छिपाया नहीं जाता, बल्कि सभी विश्वविद्यालयों के शोधार्थी और शिक्षक उस पर मिलकर काम करते हैं।

इतना ही नहीं यूरोप में शोध कार्य सुपरवाइजर की मर्जी पर नहीं टिका होता, बल्कि शोधार्थी के मूल विचारों और काम को ही तवज्जो दी जाती है। भारत और यूरोप की शोध प्रक्रिया पर यह बेबाक टिप्पणी की कोटा की बेटी अदिति पॉल ने।

राजकीय महाविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर करने के बाद अदिति अब चेकोस्लोवाकिया की राजधानी प्राग में स्थित चाल्र्स यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी कर रही हैं। वह कोटा विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल लेने के लिए शनिवार को कोटा पहुंची।

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