राजस्थान: गुर्जर आरक्षण आंदोलन को लेकर रेलवे सतर्क, पिछले सालों में 72 लोगों की हो चुकी है मौत

जयपुर. मंगलवार को बयाना में गुर्जर आरक्षण महापंचायत को देखते हुए सरकार ने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के साथ हुई वार्ता में कोई सहमति नहीं बन पाई है। मंत्रियों का तर्क था कि केंद्र में लागू हुआ तो प्रदेश में भी संभव होगा। बता दें कि आंदोलन के दौरान किसी भी तरह की विपरित स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने रेपिड एक्शन फोर्स (आरपीएफ) की अकिरिक्त कंपनियां तैनात की गई है। इनमें तीन कंपनियां भरतपुर संभाग में तैनात रहेंगी। 2007 से शुरू हुई इस आंदोलन में अबतक 72 लोगों की जान जा चुकी है।

गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के भी महापंचायत में आने पर रोक

– भरतपुर में बयाना के गांव अड्डा में 15 मई को गुर्जरों की महापंचायत को देखते हुए 30 मई तक भरतपुर जिले में धारा 144 लगा दी गई है।
– इसके अलावा जिले के पांच थाना क्षेत्रों के 102 गांवों में मोबाइल इंटरनेट सेवा 13 मई को शाम 4 बजे तक बंद कर दी गई हैं।
– गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के भी महापंचायत में आने पर रोक लगा दी गई है। भरतपुर की सीमा में घुसते ही उनकी गिरफ्तारी होगी। इस बीच, कलेक्टर-एसपी ने गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से मुलाकात कर समझौते के लिए पहल की है।

आरपीएफ की कंपनियां पहुंची

– आरपीएफ की एक कंपनी को भरतपुर के बयाना, दूसरी कंपनी को हिंडौन व तीसरी कंपनी को भरतपुर शहर में तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि सोमवार शाम तक आरपीएफ की तीन और कंपनियां भरतपुर पहुंच जाएगी।

– इसी तरह, भरतपुर रेंज के पुलिस बल और पहले यहां तैनात रह चुके पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा आरएसी की एक दर्जन कंपनियां बुलाई गई है।

बैंसला ने 15 मई को महापंचायत से आंदोलन शुरु होने का अल्टीमेटम दिया था

-गौरतलब है कि पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज ने पिछले दिनों एक सभा की थी। इसके बाद गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने 15 मई को बयाना के अड्डा गांव से गुर्जर आरक्षण आंदोलन शुरु करने का ऐलान किया था।
– यह आंदोलन किस रुप में होगा। बैंसला ने इसका खुलासा नहीं किया था। हालांकि किरोड़ी बैंसला ने प्रदेश के गुर्जरों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया था।

सरकार ने बैंसला व अन्य प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए जयपुर बुलाया

– मंगलवार, 15 मई से बयाना में गुर्जर आरक्षण महापंचायत और आंदोलन को देखते हुए सरकार ने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को सोमवार शाम साढ़े पांच बजे सचिवालय में वार्ता के लिए बुलाया भेजा है।

सरकार अपना ट्रेंड बदले तब थमे आरक्षण आंदोलन की आग

– पिछले एक दशक से आरक्षण की मांग पर हर बार आंदोलन से गुर्जर समाज कम से कम 15 दिन पहले राज्य सरकार को अल्टीमेटम देता रहा है।
– अधिकांश मामलों में राज्य सरकार का ट्रेंड रहा है कि आंदोलन भड़कने के बाद ही गुर्जरों से समझौते किए गए। यही हाल इस बार भी है।
– अगर राज्य सरकारें अपना ट्रेंड बदलती तो अब तक हुए 72 लोगों की जान और डेढ़ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के आर्थिक नुकसान को बचाया जा सकता था।

पुराने ढर्रे पर ही लिए गए सामान्य एक्शन

– इस बार 15 मई से गुर्जर फिर से बयाना के अड्डा गांव से महापंचायत के माध्यम से आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं। हालांकि, पुराने ढर्रे पर ही पुलिस- प्रशासन की तैनातगी और एहतियात के तौर पर जो सामान्य एक्शन लेने है वो ले लिए गए हैं। इस बार आंदोलन की घोषणा 2 मई को की गई थी।

ये है जान-माल के नुकसान के सरकारी आंकड़े

– गुर्जर आरक्षण की वजह से अब तक 145 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्तियों और राजस्व का नुकसान दर्ज किया गया। जबकि, आम आदमियों व प्रतिष्ठानों का 13 हजार 500 करोड़ रु. से ज्यादा का आमजन को सरकारी नुकसान हुआ है। 2007 में साढ़े चार हजार करोड़ रु. का नुकसान रहा था और 2008 में 9 हजार करोड़ का नुकसान माना गया था।

– राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दायर एक हलफनामे में बताया था कि सरकारी संपत्तियों के मामलों में भरतपुर में 35 करोड़, दौसा 45 करोड़ रु. सवाई माधोपुर 11 करोड़ सवाई, अलवर 8 करोड़ रु. टोंक, 8 करोड़ रू. कोटा 5 करोड़, बूंदी में 11 करोड़ भीलवाड़ा में 3 करोड़, अजमेर में 2 करोड़, झुंझुनूं में 1 करोड़ रु, इनके अलावा जयपुर सहित अन्य जिलों में 15 करोड़ रु. से ज्यादा का सरकारी संपत्तियों और राजस्व का नुकसान दर्ज किया गया है। इसमें रेलवे ट्रैक सरकारी, बसें, पुलिस चौकी और थाने, तहसील शामिल है।

सिर्फ सरकार के पास बचा है विकल्प

गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के मुताबिक, अभी तक राज्य सरकार की तरफ से कोई बात या पक्ष नहीं आया है। गुर्जर समाज आरक्षण की मांग पर आंदोलन शुरु करने जा रहा है। अब समाज के पास कोई विकल्प नहीं है। हालांकि राज्य सरकार के पास समाधान का विकल्प है।

कितने दिन चले आंदोलन और गुर्जरों ने सरकार को कितने दिन पहले बताया

– 2007 में 29 मई से 5 जून: सात दिन में 22 जिले प्रभावित रहे। 38 लोग मारे गए। गुर्जरों ने 11 अप्रेल 2007 यानी की पौने दो महीने पहले ही बता दिया था कि आंदोलन होगा और राष्ट्रीय राजमार्ग रोके जाएंगे।

– 23 मई से 17 जून 2008: 27 दिन तक आंदोलन चला। 22 जिलों के साथ 9 राज्य प्रभावित रहे। 30 से ज्यादा मौतें हुई। गुर्जरों ने 5 मई को अल्टीमेटम दिया था।

– 20 दिसंबर 2010: बयाना में रेल रोकी गई थी। इसकी घोषणा 8 दिसंबर 2010 यानी 12 दिन पहले हुई थी।

– 21 मई 2015: कारवाड़ी पीलुकापुरा में रेलवे ट्रैक रोका और इसकी सूचना 13 मई 2015 को ही दी गई।

– अब तक 72 गुर्जर आंदोलन में मरे। राजस्थान में 70 और हरियाणा-पानीपत और यूपी फिरोजाबाद में एक-एक व्यक्ति आंदोलन में मारा गया।