रायगढ़ : केलो डेम में संचित किए गए 4.28 लाख नग मछली बीज

रायगढ़ शहर से लगभग 8 कि.मी. की दूरी पर केलो नदी पर बना डेम सिंचाई, पेयजल एवं औद्योगिक संस्थानों को जलापूर्ति करने के साथ-साथ 161 मछुआ परिवारों के जीवन-यापन का माध्यम है। केलो डेम में मछली पालन को बढ़ावा देने तथा मछुवारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग रायगढ़ द्वारा 30 दिसम्बर बुधवार को मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों की उपस्थिति में 4  लाख 27 हजार 900 नग भारतीय मेजर कार्प के फिंगरलिंग मछली बीज का संचयन किया गया। केलो डेम कपिल मछुआ सहकारी समिति कसडोल को मत्स्य पालन के लिए शासन द्वारा पट्टे पर दिया गया है। इस समिति से 161 मछुआ परिवार जुड़े है जो गेरवानी, लाखा और कसडोल के रहने वाले है।
सहायक संचालक मत्स्य श्री एस.के.चौधुरी ने बताया कि केलो डेम का जलक्षेत्र 855.785 हेक्टेयर है। यह डेम रायगढ़ एवं तमनार ब्लाक के अंतर्गत आता है। यह डेम मछली पालन के लिए कपिल मछुआ सहकारी समिति कसडोल को पट्टे पर दिया गया है। मत्स्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड योजनान्तर्गत यहां 4 लाख 27 हजार 900 मत्स्य बीज जिसमें रोहू, कतला, मृगल शामिल है, नि:शुल्क संचित किए गए है। उन्होंने बताया कि 30 दिसम्बर को मॉनिटरिंग समिति के सदस्य तहसीलदार रायगढ़ श्री अतुल शेटे, अनुविभागीय अधिकारी केलो परियोजना निर्माण जे.एस.विरदी, जनपद सदस्य श्रीमती चमेली सिदार तथा कपिल मछुआ सहकारी समिति के सदस्यगणों तथा विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में केलो डेम में मत्स्य बीज का का संचयन किया गया। डेम में डाले गए मत्स्य बीज भारतीय मेजर कार्प के फिंगरलिंग जिनकी साईज 80 से 100 एमएम थी। श्री चौधुरी ने बताया कि केलो डेम में संचित किए गए कतला मछली बीज एक साल में डेढ़ से पौने दो किलो तथा रोहू एवं मृगल एक साल में एक-एक किलो वजन के हो जायेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि केलो डेम को पट्टे पर मछली पालन के लिए हासिल करने वाली कपिल मछुआ सहकारी समिति में 80 और मछुआ परिवारों को शामिल किए जाने की कार्रवाई विभाग द्वारा की जा रही है।

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