रायपुर : तीन रुपए में 30 मिनट के लिए किराए पर मिलेगी साइकिल

रायपुर। अगर आप साइकिल चलाने के शौकीन हैं और कुछ घंटे साइकिलिंग कर पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी देना चाहते हैं तो खुशखबरी है। रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बंगलुरू की कंपनी जूम कार से एमओयू साइन कर लिया है, जो अगस्त के पहले हफ्ते से 100 साइकिल राजधानी की सड़क पर उतारने जा रही है।

यह पूरा प्रोजेक्ट पीपीपी मोड पर है। आपको तीन रुपये प्रति 30 मिनट के हिसाब से भुगतान करना पड़ेगा। इसके लिए पहला रूट भी तय कर लिया है, जो यूथ हब आश्रम चौक से लेकर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (यूनीवर्सिटी) तक है।

रविवार तीन जून को वर्ल्ड बाइसिकल-डे के मौके पर निगम मुख्यालय में स्मार्ट सिटी एमडी रजत बंसल और कंपनी के रीजनल हेड आनंद विश्वास के बीच एमओयू हुआ। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दो कंपनी जूम कार और ओफो को लेकर रायपुर स्मार्ट सिटी के अफसरों को जानकारी दी थी।

जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट जैसे-जैसे सफल होगा, साइकिल की संख्या 1500 तक जाएगी, तीन और रूट पर सर्वे किया जा रहा है। इनमें गौरव पथ, मेडिकल कॉलेज से टेंडल कॉलेज प्रमुख रूप से शामिल है।

रद होगा पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग प्रोजेक्ट

इस नए एमओयू से स्मार्ट सिटी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग’ रद हो सकता है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंदर इस पर चर्चा भी शुरू हो चुकी है। बतां दें कि ‘पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग’ प्रोजेक्ट को लेकर दो बार टेंडर हो चुका है। पहला टेंडर एक कंपनी द्वारा दस्तावेज पूरे न होने की वजह से रद किया गया, दूसरे में सिर्फ एक ही कंपनी आई। इस प्रोजेक्ट के तहत 25 स्टॉपेज, 250 साइकिल उतारने की प्लानिंग थी। अब इसे होल्ड पर डाल दिया गया है।

आखिर किस काम का 1.20 का साइकिल ट्रैक

स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने गौरव पथ में नागपुर की कंपनी केटलाइन को 1.20 करोड़ रुपये का टेंडर देकर 2.5 किमी का साइकिल ट्रैक बनवाया था। नए एमओयू में गौरवपथ को नहीं बल्कि आश्रम से यूनीवर्सिटी तक का रूट तय किया है, क्योंकि वहां यूथ मिलते हैं।

एनआइटी, साइंस कॉलेज, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, अब ऑक्सी रीडिंग जोन, इंटरनेशनल स्वीमिंग पूल (तरणताल), संस्कृत कॉलेज के छात्र हैं। जबकि गौरवपथ में कोई नहीं मिलता। साइकिल चलती ही नहीं है, इस पर अवैध कब्जा रहता है। सिर्फ साइकिल डे या नो व्हीकल डे पर ही साइकिल चलाने लोग पहुंचते हैं।

तीन क्षेत्रों की प्लानिंग है

यह प्रोजेक्ट अगर सफल रहा तो पहले जारी किए गए पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग टेंडर को रद भी कर सकते हैं, इस पर विचार कर रहे हैं। पूरा प्रोजेक्ट पीपीपी मोड पर है, अच्छा रिस्पोंस होगा तो आगे बढ़ाएंगे