रायपुर में 40 लोगों ने ही किया बेनामी प्राॅपर्टी का खुलासा, कीमत 20 करोड़

रायपुर.राजधानी रायपुर में सिर्फ 40 लोगों ने ही काली कमाई से बनाई गई बेनामी संपत्ति का खुलासा किया है। इसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपए आंकी गई है। इन लोगों ने अपने नौकरों और रिश्तेदारों के नाम पर ये प्राॅपर्टी खरीदी थी, लेकिन अब कानूनी तौर पर अपने नाम करवाना चाहते हैं। इन बेनामी संपत्तियों की दोबारा रजिस्ट्री हो चुकी है। आयकर विभाग को पहले ही इसकी सूचना दे दी गई थी। विभाग से सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही बेनामी संपत्ति की रजिस्ट्री की गई।
इस दौरान पड़ताल में पता चला कि कालेधन से खरीदी गई ज्यादातर बेनामी प्रापर्टी शहर के आउटर और नई बन रही कालोनियों के आस-पास हैं। इन लोगों ने बड़े-बड़े प्लॉट खरीदे रखे थे। इनमें से कोई भी प्रापर्टी एक एकड़ रुपए से कम नहीं है। राज्य में ऐसा पहली बार हुआ है जब लोगों ने अपनी बेनामी संपत्ति की जानकारी सरकार को देने के बाद उसे अपने नाम पर करवाने के लिए आवेदन दिया है।
सरकारी स्कीम के तहत अर्जी, रिकार्ड में अपने नाम नहीं की तो होगी जब्त
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की आय घोषणा योजना (आईडीएस)- 2016 के तहत लोगों ने अर्जियां दी हैं। इसके तहत 30 सितंबर 2017 तक इच्छुक व्यक्ति अवैध प्रॉपर्टी की घोषणा खुद कर सकते थे। उनके कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। अब डेडलाइन खत्म होने के बाद कोई बेनामी संपत्ति मिली तो इसे जब्त कर लिया जाएगा।
ऐसे हुई पूरी प्रक्रिया
केंद्र सरकार की इनकम डिसक्‍लोजर स्‍कीम में स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित अवधि में बेनामी संपत्ति की खुद घोषणा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी के तहत आयकर विभाग ने इनकी प्रापर्टी को आय में जोड़ने के बाद स्व घोषणा पत्र के आधार पर सर्टिफिकेट जारी किया जिसे रजिस्ट्री ऑफिस में पेश किया गया। आवेदन में कहा गया कि मेरी प्रापर्टी दूसरे के नाम पर है, उसे मेरे नाम पर की जाए।
स्टांप से 3 करोड़ की कमाई: रजिस्ट्री विभाग को प्रापर्टी की नए सिरे से रजिस्ट्री करने पर 3 करोड़ की स्टांप ड्यूटी की कमाई हुई है। आयकर विभाग के टैक्स में भी इजाफा हुआ है। अब हर साल टैक्स बढ़कर मिलेगा, क्योंकि प्रापर्टी आय में शामिल हो गई है।

40 लोगों ने ही की बेनामी संपत्ति की घोषणा : आरएल साहू
केंद्र सरकार की इनकम डिसक्‍लोजर स्‍कीम (आईडीएस)-2016 के तहत राजधानी के 40 लोगों ने बेनामी संपत्ति की घोषणा की है। इन लोगों ने आयकर विभाग में इसकी सूचना और सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद रजिस्ट्री के लिए आवेदन किया है। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही इनका निराकरण किया जा रहा है।

आरएल साहू, चीफ सब रजिस्ट्रार, पंजीयन विभाग