रावण ने मरते वक्त लक्ष्मण को दी थी सीख, जो हैं सफलता की कुंजी

आज का युग बेशक कॉर्पोरेट कल्चर वाला युग है, लेकिन हमारे पौराणिक ग्रंथों में बताई गई बातें आज भी सौ फीसदी सटीक बैठती है। ऐसी ही कुछ सीखें रावण ने मरते वक्त लक्ष्मण को दी थी।

श्रीराम के तीर से जब रावण मरणासन्न् स्थिति में पहुंच चुका था, तब भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण को अपने समीप बुलाकर कहा कि रावण जैसा प्रकांड विद्वान, ज्ञानी और समस्त धर्म शास्त्रों का ज्ञाता इस संसार से विदा हो रहा है। तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ अनमोल शिक्षा ग्रहण करो।

श्रीराम की बात सुनकर लक्ष्मण रावण के समीप पहुंचे और उसके सिर के पास जाकर खड़े हो गए। जब काफी देर खड़े रहने के बाद भी रावण ने कुछ नहीं कहा, तब लक्ष्मण राम के पास लौटे और कहा कि रावण तो कुछ बोलता ही नहीं। श्रीराम ने कहा, लक्ष्मण तुमने बड़ी भूल कर दी।

जब किसी से शिक्षा ग्रहण करना हो तो उसके सिर के पास नहीं बल्कि उसके चरणों में बैठकर ज्ञान हासिल करना चाहिए। लक्ष्मण पुन: रावण के पास पहुंचे और इस बार उसके चरणों में बैठे। तब रावण ने लक्ष्मण को सफल जीवन जीने की तीन सीखें दी, जो आज के संदर्भ में भी मायने रखती है। खासकर कार्पोरेट कंपनियों को इन सीखों को जरूर अमल में लाना चाहिए।

पहली सीख : रावण ने लक्ष्मण को पहली सीख दी ‘शुभस्य शीघ्रम”। यानी शुभ कार्य जितनी जल्दी हो सके कर लेना चाहिए, लेकिन अशुभ कार्य को टालना ही बेहतर होता है। मैं श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी। इस कारण मेरी ये हालत हुई। आज के संदर्भ में इसे देखें तो व्यक्ति इसे केवल अपने ऊपर अप्लाई करे या कंपनी पर, कभी भी अच्छे फैसलों को लागू करने में देरी नहीं करना चाहिए। वरना नुकसान हमारा ही होता है।

दूसरी सीख : अपने शत्रु को कभी कमजोर और छोटा नहीं समझना चाहिए। रावण ने लक्ष्मण को कहा कि मैं श्रीराम और उनकी सेना को छोटा समझने की भूल कर बैठा था। मैंने श्रीराम की सेना में शामिल वानरों और भालुओं को तुच्छ समझा, लेकिन उन्होंने ही मेरी पूरी सेना को नष्ट कर डाला। आज के संदर्भ में भी रावण की यह सीख जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। आप चाहे किसी भी प्रोफेशन में हों या किसी कंपनी के ऑनर हो, आपको कभी भी अपने प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर और छोटा नहीं मानना चाहिए। सभी प्रतिद्वंद्वियों को गंभीरता से लेते हुए उनकी एक-एक हरकत और फैसलों पर नजर रखना चाहिए, तभी आप एक सफल कॉर्पोरेट बन सकते हैं।

तीसरी सीख : अपने राज किसी को न बताएं। रावण ने लक्ष्मण को तीसरी और अंतिम सीख यह दी कि अपने राज हमेशा राज ही रखें। मैंने विभीषण को अपनी मृत्यु का राज बता रखा था, जो मेरी सबसे बड़ी गलती थी। विभीषण ने राम को मेरी मृत्यु का राज बताया तो मेरी यह दशा हुई। यह बात भी काफी महत्वपूर्ण है। अपनी कंपनी के या अपने निजी फैसले कभी भी किसी से शेयर न करें, शत्रु आपके चारों ओर फैले हुए हैं। क्या पता कौन प्रतिद्वंद्वी या आपने द्वेष रखने वाला उस बात का फायदा उठाकर आपको नुकसान पहुंचा बैठे।