राष्ट्रपति ने जमीन पर बैठकर किया भोजन, बोले, 14 अंक मेरे जीवन को सुखद अनुभव देता है

इंदौर।डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती समारोह में शामिल हाेने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार सुबह सवा 11 बजे इंदौर पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति का वेलकम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम शिवराज ने किया। राष्ट्रपति यहां से सेना के हेलिकॉप्टर से महू पहुंचे और बाबा साहब की जन्मस्थली स्वर्ग मंदिर में बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा साहब की जन्म-जंयती पर महू आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल को हुआ था यह अंक मेरे जीवन को सुखद अनुभव देता है। राष्ट्रपति ने यहां चयनित 15 लोगों के साथ बैठकर भोजन किया।

14 अंक मुझे सुखद अंक देता हूं- राष्ट्रपति

– राष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम आज बाबा साहब की 127वीं जयंती मना रहे हैं। बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल को हुआ था। मैं बताना चाहता हूं कि 14 अंक मेरे जीवन को सुखद अनुभव देता है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे देश का 14 वां राष्ट्रपति बनाया गया और राष्ट्रपति बनने के बाद 14 अप्रैल को ही बाबा साहब के जन्मदिन पर उनकी जन्मस्थली आने का मौका मिला। मैं जब यहां आ रहा था तो मैंने एक सवाल किया कि मुझसे पहले के 13 राष्ट्रपति में से कौन-कौन 14 अप्रैल को बाबा साहब की जन्मस्थली महू गए हैं। मुझे पता चला कि मैं पहला राष्ट्रपति हूं जो बाबा साहब के जन्मदिन पर महू पहुंचा हूं। यह मेरा सौभाग्य है कि जिस संविधान को हम सब पढ़ते हैं, उसके रचयिता के जन्मदिवस पर मैं यहां आया।

– मैं बाबा साहब की जन्मभूमि पर राष्ट्रपति बनने के पहले कई बार आया। इस धरा पर कदम रखने के बाद मुझे बाबा साहब के मार्ग पर चलने का बल मिलता है। जब मैं जन्मस्थली पहुंचा तो अापने मेरा स्वागत जय भीम से किया। जय भीम का मतलब है, बाबा साहब के आदर्श। बाबा साहब का संविधान हमें स्वतंत्रतापूर्वक जीवन जीने का अधिकार देता है। यह संविधान हमें शिक्षा का अधिकार देता है। बाबा साहब का मानना था कि मनुष्य के लिए सबसे जरूरी शिक्षा है, बिना इसके उनका विकास संभव नहीं है।

– यह इतिहास की बात है, लेकिन हमें यह जानना जरूरी है। देश की पहली कैबिनेट में बाबा साहब को विधि मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस समय नेहरूजी के मंत्रीमंडल में जितनी डिग्री बाबा साहब के पास थी, शायद वह किसी के पास नहीं थी। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाबा साहब शिक्षा को कितना महत्व देते थे। बाबा साहब जब 27 वर्ष के थे, तब उनका एक लेख प्रकाशित हुआ था। उस लेख के कारण बाबा साहब एक अर्थशास्त्री के रूप में स्थापित हुए। रिवर्ज बैंक बाबा साहब की देन है। वे महिला सशक्तिकरण के पक्षधर थे। जिस अाधुनिक भारत की हम बात कर रहे हैं, उनकी नींव बाबा साहब ने रखी थी। आज हमारी सिंचाई परियोजनाएं बाबा साहब की देन हैं। 12 घंटे की बजाय 8 घंटे काम करने का अधिकार बाबा साहब की ही देन है। बाबा साहब कहते थे कि मैं पहले भारतीय हूं, बाद में भी भारतीय हूं, और अंत में भी भारतीय हूं। बाबा साहब का कहना था कि मैं भारतीय हूं, फिर हिंदू हूं, फिर अमीर हूं, गरीब हूं, ये शब्द नहीं कहने चाहिए। क्योंकि ये विभाजन करने वाले शब्द हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं आप सब से अपील करता हूं कि आप दिल्ली आएं तो राष्ट्रपति भवन जरूर देखें, ये राष्ट्रपति की नहीं हर भारतीय की धरोहर है। ये बात मैंने विदेश में भी मौजूद भारतीयों से कही है।

आधुनिक भारत बाबा साहब की देन- राज्यपाल पटेल

– राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बाबा साहब की जन्मस्थली महू ने मप्र को विश्व में एक अलग पहचान दिलवाई है। बाबा साहब ने ना केवल हमें भारतीय संविधान दिया, वे अधुनिक भारत के निर्माता भी हैं। आज कमजोर वर्ग और महिलाओं के उत्थान के लिए हमें काम करने की जरूरत है। बाबा साहब के रास्ते पर चलकर मप्र सरकार कमजोर वर्ग को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ सरकार कौशल विकास के तहत कमजोर वर्ग को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। वर्तमान में कमजोर वर्ग के कई युवा मप्र सरकार की मदद से विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हमें बाबा साहब के मार्ग पर चलते हुए हर कमजोर को उठाने की दिशा में कार्य करना होगा।

आपातकाल लगाने वाले संविधान बचाने की बात करते हैं- सीएम शिवराज

– सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मप्र की धरा पर राष्ट्रपति का स्वागत करता हूं। यह मप्र का सौभाग्य है कि इस धरा पर बाबा साहब का जन्म हुआ। यह बाबा साहब की देन है कि आज महिला-पुरुष को समान अधिकार मिले हैं। बाबा साहब ने ही हमें 12 घंटे की बजाय 8 घंटे तक काम करने की आजादी दिलवाई। अपनी सरकार में आपातकाल लगाने वाले संविधान बचाने की बात कह रहे हैं। कांग्रेस की सरकार ने महू में बाबा साहब की जन्मस्थली पर एक ईंट तक नहीं लगाई, वे आज बाबा साहब को याद कर रहे हैं। बाबा साहब को हराने के लिए जिन्होंने प्रचार किया, वे संविधान बचाने की बात कहते हैं। अपने ही परिवार के कई लोगों को भारत रत्न दे दिया, लेकिन बाबा साहब को भारत रत्न से नहीं नवाजा, वे बाबा साहब के सम्मान की बात करते हैं। बीजेपी बाबा साहब, पंडित दीनदयाल के बताए मार्ग पर चल रही है। बाबा साहब का दिल हर वर्ग के लिए धड़कता था, इसलिए बाबा साहब को किसी एक वर्ग से जोड़ना सही नहीं है। मैं घोषणा करता हूं कि मप्र में हर गरीब, कमजोर जमीन के टुकड़े का मालिक होगा। प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत सबको पक्के मकान मिलेंगे। मजदूरों के बच्चों को कॉलेज भी मप्र सरकार करवाएगी। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में पंचतीर्थ को भी शामिल किया जा रहा है, अब आप पंचतीर्थ के दर्शन भी कर पाएंगे।

बाबा साहब ने हमें दिलाया समानता का अधिकार – मंत्री गेहलोत

– कंद्रीय मंत्री थारवचंद गेहलोत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहब की ही देन है कि आज देश में सब समान हैं। वे अजा और अजजा और पिछड़े वर्ग के सम्मान के लिए लड़ते और भारत के संविधान में सभी को समानता का अधिकार दिया। महू में भव्य स्मारक बनवाने का सपना पटवा जी ने सीएम रहते देखा था। पटवा जी ने इसकी जिम्मेदारी मुझे और पूर्व सीएम बाबूलाल गौर जी को दी थी। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने महू आकर स्वर्ग मंदिर का भूमिपूजन किया, लेकिन 8 साल तक दूसरी सरकार होने से इसका काम बंद रहा। सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने इस योजना को पूर्ण करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई 14 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि स्वीकृति की। पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी ने इस मंदिर का उद्घाटन किया। पीएम मोदी और सीएम शिवराज लगातार कमजोर वर्ग के लिए कार्य कर रहे हैं।

बाबा साहब शिवजी का एक रूप थे- विधायक विजयवर्गीय

– महू विधायक और बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस देश के गरीब वर्ग का मान बढ़ाने वाले हमारे राष्ट्रपति का मैं महू और प्रदेश की ओर से स्वागत करता हूं। महू वीरों की धरती है। यहां बाबा साहब का जन्म हुआ। यहीं से सीखकर हमारे जवान देश के कोने-कोने तक पहुंचते हैं और देश की सेवा में जुट जाते हैं। बाबा साहब का जन्म यहां हुआ यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। जब मैंने बाबा साहब को पढ़ा तो लगा कि बाबा साहब भोलेनाथ का एक रूप थे। जिस प्रकार धरती पर जीवन को बचाने के लिए भोलेनाथ ने विष का पान किया था। उसी प्रकार बाबा साहब ने सामाजिक बुराइयों का जहर खुद पिया, लेकिन संविधान रूपी अमृत देशवासियों को बांटा।

राष्ट्रपति ने किया दीप प्रज्जवलित

– स्वग मंदिर के पास बने पांडाल में बाबा साहब और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान राज्यपाल ने राजबाड़ा की प्रकृति, सीएम शिराजसिंह चौहान ने भोपाल स्थित शौर्य स्मारक की प्रकृति और आंबेडकर समिति ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा राष्ट्रपति को भेंट की। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, सीएम शिवराजसिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री थारवचंद गेहलोत, वित्तमंत्री जयंत मलैया, मंत्री अंतर सिंह, लाल सिंह आर्य, गौरीशंकर विसेन, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गी, इंदौर महापौर मालिनी गौड़ी सहित हजारों अनुयायी मौजूद थे।

5 घंटे 50 मिनट जिले में रहे राष्ट्रपति
– राष्ट्रपति सुबह 11.20 पर सेना के विमान से आए।
– सुबह 11. 30 पर हेलिकॉप्टर से महू के लिए रवाना हुए।
– सुबह 11. 50 पर आर्मी वॉर कॉलेज ग्राउंड पर हेलिकॉप्टर उतरा।
– दोपहर 12.10 पर डॉ. आंबेडकर के स्मारक पर पहुंचे।
– दोपहर 2.30 बजे तक आयोजन में रहे।
– दोप. 2.40 पर हेलिकॉप्टर से इंदौर पहुंचे।
– दोप. 3.10 पर इंदौर आकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

राष्ट्रपति के लिए ऐसी थी तैयारी
– राष्ट्रपति के लिए स्वर्ग मंदिर के पास 1800 स्क्वेयर फीट का पांडाल बनाया गया था।
– पांडाल एसी के साथ ही फायर रेजिस्टेंस सिस्टम से लैस था।
– भीम जन्मभूमि स्मारक तक 26 कैमरे लगाए गए थे।
– कैमरे हाई रिजोल्युशन के साथ ही 360 डिग्री तक घूम सकते थे।

– कार्यक्रम स्थल की ड्रोन से निगरानी की जा रही थी।

– सीसीटीवी कैमरे ऐसे थे, जो शर्ट के बटन का रंग तक पकड़ लें।

– समारोह स्थल पर 20 से ज्यादा एंबुलेंस, 1 हजार से अधिक पुलिस, 15 से अधिक दमकल मौजूद रहीं।

करीब एक लाख अनुयायी महू पहुंचे
– आंबेडकर जयंती समारोह में शामिल होने करीब एक लाख अनुयायी महू पहुंचे।
– स्वर्ग मंदिर क्षेत्र स्थित मैदान पर वाटरप्रूफ डोम बनाया गया था।
– मंच पर राष्ट्रपति के साथ करीब 15 चुनिंदा लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी।
– सभास्थल पर मीडिया गैलरी के अलावा वीआईपी व इलेक्ट्रानिक मीडिया स्टैंड भी था।
– प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए अलग-अलग प्रवेश स्थल थे।

200 लोगों के भरोसे थी भोजन व्यवस्था
– भोजन बनाने का जिम्मा 50 कारीगरों सहित 200 महिला-पुरुष पर थी।
– भोजन सर्व करने के लिए 30 काउंटर पर 300 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद थे।
– भोजन में पूड़ी, रामभाजी, मीठी नुक्ती, नमकीन, तली हुई मिर्ची, खिचड़ी व केरी की लौंजी शामिल थी।