रेजीडेंट डॉक्टर्स की बढ़ी मुश्किलें, वसुंधरा सरकार ने हॉस्टल खाली करवाने के दिए निर्देश

परीक्षा प्रणाली में बदलाव का विरोध करते हुए हड़ताल पर गए रेजीडेंट डॉक्टर्स की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. राजस्थान सरकार ने हड़ताली रेजीडेंट्स पर और सख्ती करते हुए हॉस्टल खाली करवाने का निर्णय लिया है.

राज्य सरकार की ओर से भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है

उधर, प्रमुख सचिव मुकेश शर्मा ने गुरुवार को संभागीय हेडक्वाटर्स के कलेक्टरों के साथ वीडियो कांफ्रेंस कर अस्पतालों में तमाम सुविधाएं सूचारू करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही आवश्यकता पड़ने पर निजी अस्पतालों का भी सहयोग लेने के निर्देश दिए हैं.

रेजीडेंट डॉक्टर्स पीछे हटने को नहीं तैयार

रेजीडेंट्स हड़ताल को वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं. मीडिया से मुखातिब होते हुए रेंजीडेंट डॉक्टर्स ने अपना पक्ष सामने रखते हुए हड़ताल पर जाने के कई कारण गिनाए. उन्होंने कहा कि सरकार एमसीआई गाइड लाइन को पूरी तरह लागू करे तो रेजीडेंट्स हड़ताल खत्म करने को तैयार हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एमसीआई गाइड लाइन की मनमानी व्याख्या कर रही है और मेरे खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है कि थीसिस, कॉपी की चैकिंग से डर रहे हैं, बल्की ऐसा नहीं है. अधिकांश रेजीडेंट्स ऐसे हैं जो पढ़ाई करके ही मैरिट में आए हैं. रेजीडेंट्स ने साफ किया कि चाहे जो हो चाए जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा आंदोलन जारी रहेगा.

हड़ताल के समर्थन ये उतरे

प्रदेशभर में जारी रेडीडेंट्स की हड़ताल के समर्थन में अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ भी उतर आया है. संघ के बैनर तले प्रदेशभर में सेवारत चिकित्सकों ने दो घंटों का पेन डाउन किया. सुबह आठ से 10 बजे तक सेवारत चिकित्सकों ने पेन डाउन कर कार्य बहीष्कार किया. संघ की महासचिव डॉ. नसरीन भारती ने कहा कि सरकार को रेजीडेंट डॉक्टर्स की जायज मांगों को मानना चाहीए. साथ ही रेजीडेंट्स के खिलाफ की जा रही दमनात्मक कार्रवाई की निंदा की.

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