वालमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे से मिलेगा डेढ़ से दो अरब डॉलर का टैक्स

नई दिल्ली। वालमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे से सरकार को डेढ़ से दो अरब डॉलर यानी करीब तेरह हजार करोड़ रुपये का टैक्स रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट में 77 फीसद इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने का सौदा करने वाली अमेरिकी रिटेल कंपनी वालमार्ट को इस सौदे पर सरकार को विदहोल्डिंग टैक्स के रूप में यह राशि देनी पड़ सकती है।

हालांकि टैक्स की राशि का आकलन आयकर विभाग ही करेगा। वालमार्ट ने फ्लिपकार्ट के विभिन्न निवेशकों से यह इक्विटी खरीदने का सौदा किया है।

बुधवार को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) ने इस सौदे को स्वीकृति प्रदान की है। इसके बाद अब वालमार्ट पर टैक्स देनदारी का आकलन होगा।

जुलाई में वालमार्ट के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट व ट्रेजरर पेड्रो फाराह और उनके सहयोगी जैफ एडम्स ने आयकर विभाग के एक शीर्ष अधिकारी अखिलेश रंजन से मुलाकात कर उन्हें इस मामले में सहयोग का भरोसा दिया था।

माना जा रहा है कि जल्द ही वालमार्ट की टैक्स टीम भारत आकर फिर से टैक्स अधिकारियों से मुलाकात कर टैक्स की राशि को अंतिम रूप देने पर बात करेगी।

विदहोल्डिंग टैक्स या रिटेंशन टैक्स का मतलब ऐसे कर से है जिसका भुगतान किसी कंपनी के हिस्सेदारों से इक्विटी खरीदने वाला करता है, न कि हिस्सेदारी बेचने की एवज में धनराशि पाने वाला।

वालमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे में भी वालमार्ट ने फ्लिपकार्ट के विभिन्न शेयरधारकों से इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी है। लिहाजा इस टैक्स का भुगतान भी वालमार्ट को ही करना होगा।

आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक वालमार्ट ने बताया है कि सीसीआइ की मंजूरी के एक सप्ताह के भीतर सौदा पूरा कर लिया जाएगा।

इस आधार पर आयकर विभाग को उम्मीद है कि अगले पंद्रह दिनों के भीतर वालमार्ट की टीम अपनी टैक्स देनदारियों के आकलन को अंतिम रूप देने के लिए उनसे संपर्क कर सकती है।

वालमार्ट ने इस साल मई में फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण का एलान किया था। इसके तहत उसने फ्लिपकार्ट में सॉफ्टबैंक, नैस्पर, एस्सेल पार्टनर्स और ईबे की हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी।

इसके अतिरिक्त फ्लिपकार्ट के प्रमोटर सचिन बंसल ने भी अपनी हिस्सेदारी अमेरिकी कंपनी को बेचने का सौदा किया है।