वॉचमैन की नौकरी कर चुके नवाजुद्दीन कभी दिखते थे ऐसे, आज है मुंबई में आलीशान बंगला

किसी ने नहीं सोचा था कि फिल्मों में वेटर का रोल करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी लीड रोल करेंगे। अपने जीवन में कड़ा संघर्ष करने के बाद नवाजुद्दीन ने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जहां

उनकी गिनती बेहतरीन एक्‍टर के रूप में होती है। आज नवाजुद्दीन अपना 43वां जन्मदिन मना रहे हैं। मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव में जन्मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्मी दुनिया में अपना

मुकाम खुद बनाया। तीनों खानों के साथ काम कर चुके नवाजुद्दीन के बारे में जानें कुछ अनकही बातें…
नवाज के परिवार में आठ भाई-बहन थे। पिता किसानी करते थे इसमें घर का खर्च पूरा नहीं पड़ पाता था। इसलिए नवाज ने छोटी उम्र में ही नौकरी करनी शुरू कर दी थी। नवाज ने गुरुकुल कांगड़ी

यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन किया। लेकिन छोटे से कस्बे में कुछ बड़ा करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे इसलिए वो दिल्ली आ गए। खर्चा-पानी चलाने के लिए चौकीदारी की नौकरी कर

ली। सांवला होने की वजह से लोग उन्हें काला-कलूटा भी बुलाते थे।
नवाज कुछ बड़ा करना चाहते थे, कुछ कर दिखाने का जज्बा उनमें उबाल मार रहा था। इसलिए उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन ले लिया। लेकिन नवाज के पास रहने को घर नहीं

था। इसलिए उन्होंने अपने सीनियर से कहा कि वो उन्हें अपने साथ रख लें। तो नवाज के कुछ सीनियर ने उन्हें इस शर्त पर अपने अपार्टमेंट में रहने की इजाजत दी‌ कि वो उन्हें खाना बनाकर

खिलाएंगे। नवाज तैयार हो गए और अपने सीनियर के साथ रहने लगे। 1996 में वहां से ग्रेजुएट हो गए।
इसके बाद नवाज ने साक्षी थिएटर ज्वॉयन कर लिया। यहां उन्होंने मनोज बाजपेयी ओर सौरभ शुक्ला जैसे कलाकारों के साथ काम किया। ये उनकी सफलता की नहीं बल्कि संघर्ष की शुरुआत थी।

हीरो बनने की चाह में नवाज मुंबई चले आए। यहां हर ऑडिशन में रिजेक्ट कर दिए जाते थे। नवाज के जो दोस्त उनके साथ मुंबई गए थे वो थक-हार कर घर लौट गए। लेकिन नवाज डटे रहे।

नवाज की पहली पहली सरफरोश थी। इस‌ फिल्म में नवाज ने मुखबिर का रोल निभाया था। फिल्म ‘शूल’ में नवाज को एक वेटर का रोल दिया गया।
नवाज ने कभी ये नहीं देखा कि रोल छोटा है या बड़ा। बस वो पूरी लगन से काम करते रहे। इस‌ बीच उन्होंने जंगल, मुन्नाभाई एबीबीएस और कुछ शॉर्ट फिल्म में छोटे-मोटे रोल किए। उनकी

किस्मत का सितारा तब चमका जब साल 2010 में ‘पीपली लाइव’ रिलीज हुई। इस फिल्म से नवाज फिल्ममेकर्स की नजरों में आ गए। इसके बाद तो नवाज के पास फिल्मों की झड़ी लग गई।

लेकिन ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने नवाज की जिंदगी बदल दी। फिल्म में अपनी अदाकारी से उन्होंने सबका दिल जीता। आज नवाज जाना-माना नाम बन गए हैं।
इतने बड़े एक्टर होने के बावजूद नवाज के पास कोई पीआर मैनेजर नहीं है। वो अपने इंटरव्यू और डेट्स खुद हैंडल करते हैं। नजवाज का कोई ट्विटर अकाउंट भी नहीं है। अपना फेसबुक अकाउंट

भी कभी-कभी खोलते हैं। नवाज के माता-पिता गांव में ही रहते हैं। उनके गांव में कोई सिनेमा हॉल नहीं है। घर से 40 किमी तक का सफर तय करके वो नवाज को देखने के लिए थिएटर जाते

हैं। नवाज भले ही बड़े स्टार बन गए हों लेकिन लाइफ स्टाइल बिलकुल साधारण है।

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