व्यापमं, एनआईए केसों के कारण चार साल से अटकी हैं 1800 हैंडराइटिंग जांचें

इंदौर.किसी आम आदमी की पूंजी फर्जी हस्ताक्षर कर हड़प ली गई, किसी ने फर्जी रजिस्ट्री बनाकर प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया। प्रताड़ना से किसी तंग व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में प्रताड़ित करने वाले का नाम लिख दिया। पुलिस ने ऐसे सभी आरोपियों को पकड़ लिया लेकिन हस्ताक्षर फर्जी हैं या नहीं, दस्तावेज फर्जी बनाए गए या नहीं सिर्फ इसकी रिपोर्ट को आने में ही चार साल लग रहे हैं। ऐसा सिर्फ म.प्र. में हो रहा है। देश की किसी फोरेंसिक या क्यूडी लैब में इतना समय नहीं लगता। प्रदेश के 51 जिलों के 1800 प्रकरण सालों से सिर्फ ऐसी एक रिपोर्ट के कारण कोर्ट और थानों में पेंडिंग हैं। इनमें से कई मामले तो ऐसे हैं, जिनमें बीस-बीस साल तक की सजा दोषी को हो सकती है। पीड़ित थानों के चक्कर लगाते हैं, कोर्ट पर तारीखों पर जाते हैं लेकिन फैसला टलता रहता है।
900 थाने का जिम्मा एक मात्र यूनिट पर
देश में क्राइम रेट के मामले में प्रदेश के इंदौर, भोपाल टॉप-10 की सूची में हैं। सभी थानों को हाईटेक किया जा रहा है, आरएलवीडी कैमरे सहित करोड़ों के प्रोजेक्ट चल रहे हैं लेकिन क्राइम इन्वेस्टिगेशन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई उपेक्षा का शिकार है। आर्थिक अपराध सहित हैंडराइटिंग संबंधी मामलों में जांच के लिए पूरे प्रदेश में एकमात्र यूनिट है। प्रदेश के 900 के लगभग थाने और विभिन्न इकाइयों की जांच का जिम्मा सिर्फ इसी यूनिट पर है। इसे क्वेश्चन डॉक्यूमेंट (क्यूडी) यूनिट कहा जाता है। इसके प्रभारी एडीजी स्तर के अधिकारी हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के रूप में एक एसपी, दो एएसपी, तीन डीएसपी सहित 44 अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं। इस शाखा के लिए 104 का बल स्वीकृत हैं लेकिन 40 प्रतिशत स्टाफ से ही यह शाखा काम कर रही है।
इंदौर के 400 से मामलों जांच रिपार्ट लंबित
पूरे प्रदेश के 1803 मामले अगस्त की स्थिति में क्यूडी शाखा में लंबित है। भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ इंदौर जिले के 46 थानों के 90 प्रतिशत के 5-6 मामले हैंडराइटिंग जांच के लिए भोपाल स्थित क्यूडी शाखा में लंबित हैं। 400 से ज्यादा मामलों की जांच रिपोर्ट चार साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। एफएसएल और फिंगर प्रिंट की जांच के लिए जोनल स्तर पर अधिकारी हैं लेकिन हैंडराइटिंग और विवादित दस्तावेजों की जांच के लिए एक ही शाखा है। अधिकारियों का कहना है कि इंदौर और ग्वालियर में कम से कम दो लैब और होना बहुत जरूरी है।
पीड़ितों को है न्याय का इंतजार
पत्नी पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का केस, फैसला अटका
राजेंद्रनगर पुलिस ने 18 अक्टूबर 2014 को तेजपुर गड़बड़ी के गोपालसिंह की मौत में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धारा में केस दर्ज किया। मृतक ने सुसाइड नोट में पत्नी सुमित्रा और विजय पर आरोप लगाए। पुलिस ने दोनों को आरोपी बनाया लेकिन सुसाइड नोट की जांच रिपोर्ट नहीं आने से केस टलता रहा। अक्टूबर 2017 में क्यूडी लैब से रिपोर्ट आई है। इसे अब कोर्ट में पेश किया जाएगा।
प्लॉट को लेकर धोखाधड़ी का मामला चार साल बाद आई दस्तावेजों की रिपोर्ट
जूनी इंदौर पुलिस ने 25 मार्च 2013 को धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। पीड़ित संदीप राव निवासी स्कीम न. 78 को प्लॉट देने के नाम पर सात लोगों ने धोखा दिया था। पुलिस ने आरोपी उमेश जिंदल, उसकी पत्नी उमा, बेटे पलाश सहित सात लोगों पर केस दर्ज किया। दस्तावेज जांच के लिए क्यूडी शाखा भेजे गए। रिपोर्ट 10 अक्टूबर 2017 को प्राप्त पर अब पुलिस कोर्ट में पेश करेगी।
पति ने ली थी पत्नी की जान, इस महिने आई क्यूडी लैब से जांच
एरोड्रम थाना क्षेत्र के स्कीम 155 के खुले मैदान में 22 मई को शिवाबाई पति कमल पटेल की लाश मिली थी। जांच में खुलासा हुआ उसे पति कमल पटेल ने ही मारा था। पुलिस को दस्तावेज मिले थे, जिससे हत्या का उद्देश्य साबित हो रहा था। इन्हें जांच के लिए क्यूडी शाखा भेजा गया था। तब से मामला कोर्ट में पेंडिंग है। इस महीने ही इसकी रिपोर्ट आई है।
6 साल बाद बैंक मैनेजर को सजा
2011 में महिदपुर के राघवी थाने में तत्कालीन जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक सुंदरलाल व्यास के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज बनाने, फर्जी हस्ताक्षर से लोन पास करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। केस का फैसला सितंबर 2017 में आ सका। इसमें सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य क्यूडी शाखा के डीएसपी ऋतिराज गुप्ता की रिपोर्ट को माना गया। कोर्ट ने बीस साल के कारावास के साथ 26 लाख के जुर्माना की सजा सुनाई।
इस कारण क्यूडी लैब में जांचें अटकी रहीं
– व्यापमं घोटाले की जांच के कारण पूरी टीम 2012 से व्यस्त रही। सीबीआई दिल्ली, एनआईए और यूपी एटीएस द्वारा पकड़े गए आतंकवादियों के प्रकरणों में लिखावट और साक्ष्य की जांच के लिए सेंपल इसी लैब को भेजे गए। इसी कारण पेंडेंसी बढ़ती गई। टीम दोगुनी मेहनत से प्रयास कर रही है।
-डीसी सागर, एडीजी, टेक्नीकल सर्विसेस