शतरंज से बढ़ती है एकाग्रता और बौद्धिक क्षमता

गुरुकुल कॉलेज के प्रेक्षागृह में राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता का लीग राउंड बुधवार को खेला गया। इसमें रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बलौदाबाजार, बस्तर, कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर, सरगुजा जिलों के 81 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसमें संचालक बीडी द्विवेदी ने बताया कि हर मोहरे का अपना महत्व है। दो प्यादे मिलकर राजा को भी बंदी बना सकते हैं। इसी तरह जीवन भी एक शतरंज का खेल है। इसमें शह और मात चलती रहती है। इस बात को ध्यान में रखकर हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते रहना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अंजली शुक्ला, उत्तम जैन उपस्थित रहे। डॉ. अंजली ने कहा कि शतरंज बौद्धिक क्षमता बढ़ाता है, इससे एकाग्रता भी बढ़ती है। उत्तम जैन ने कहा कि प्रतियोगिता से छुपी हुई प्रतिभा उभरती है। शारीरिक विकास के लिए प्रतियोगिताएं बहुत जरूरी हैं। इस दौरान कॉलेज की क्रीड़ा अधिकारी डॉ. रिंकू तिवारी, प्राचार्य संध्या गुप्ता और सभी प्राध्यपकगण, कर्मचारी उपस्थित रहे।

सौरभ 01 समय 6ः09- संतोष