संस्कृत पर माशिमं मेंबरों का यू-टर्न, दो साल पहले कोर्स हटाया, अब सिफारिश

रायपुर।दो साल पहले माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की परीक्षा समिति ने वोकेशनल विषय के बारे में जिस प्रस्ताव को पास किया था। अब मंडल सदस्यों को उसी पुराने फैसले पर ऐतराज है। नवमीं-दसवीं में तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जा रही संस्कृत को वोकेशनल विषय के लिए हटाया गया था। इसे ऐच्छिक किया गया था। अब वही सदस्य इसे वापस जोड़ने के पक्ष में हैं। उनकी दलील है कि वोकेशनल विषय के लिए संस्कृत समेत 22 क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्यता खत्म करना गलत है। यहां पुरानी व्यवस्था फिर से लागू होनी चाहिए। सदस्याें ने माशिमं अफसरों से यह सिफारिश की है।
– संभावना है कि आने वाले सत्र से नवमीं-दसवीं के लिए नई व्यवस्था लागू होगी। तीसरी भाषा संस्कृत पहले सभी के लिए अनिवार्य थी। लेकिन दो साल पहले कक्षा नवमी में आठ नए वोकेशनल विषय जैसे रिटेल इंडस्ट्री, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, हेल्थ केयर, एग्रीकल्चर, मीडिया एंड इंटरटेनमेंट, टेली कम्यूनिकेशन और बैंकिंग फाइनेंस सर्विस को शामिल किया गया। राज्य के करीब 400 स्कूलों में इन विषयों की पढ़ाई हो रही है। दसवीं में भी यही सिस्टम लागू किया गया।
– दसवीं की परीक्षा छह विषयों में होती है। तब माशिमं ने दो साल पहले यह तय किया कि जिन स्कूलों में वोकेशनल विषय की पढ़ाई हो रही है, वहां के छात्र तीसरी भाषा जिसमें संस्कृत समेत 22 अन्य भाषाएं हैं, इनकी जगह वोकेशनल विषय को चुन सकते हैं। यह प्रस्ताव माशिमं की परीक्षा समिति में भी रखा गया। यहां से यह पास हो गया।
– किसी तरह का विरोध नहीं हुआ। लेकिन अब इसी निर्णय पर आपत्ति जताई जा रही है। मंडल के सदस्य पुराने निर्णय को गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि दसवीं में तीन भाषा के साथ सामाजिक विज्ञान, गणित व विज्ञान कुल छह विषय है। इसके अनुसार ही परीक्षा होती रही है। तीसरी भाषा को वोकेशनल कोर्स के लिए वैकल्पिक करना गलत है। अगर वोकेशनल विषय की पढ़ाई और परीक्षा होनी है तो दसवीं में इसे सातवें विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए।
खत्म हो रहा सदस्यों का कार्यकाल
– माशिमं में सदस्य के रूप में पांच विधायक के साथ 14 अन्य सदस्य हैं। विधायकों में देवजी भाई पटेल, भोजराज नाग, तोखन साहू, चंपादेवी पावले और राजमहंत सावलाराम डाहरे शामिल हैं। जबकि शिक्षकों में सुधीर गौतम, मधुलिका तिवारी, अनिरुद्ध द्विवेदी, बीआर शर्मा, दिलीप केशरवानी, प्रकाश यादव, उमेश पाणिग्रही, दिलीप कुमार साहू, ओंकार सिंह, जगदीश सिंह मौर्य, केआर कैवर्त्य, प्रफुल्ल शर्मा, जितेंद्र कुमार सिंह और छवि मंडल हैं। इनका कार्यकाल एक सप्ताह में खत्म होने वाला है। तीन साल पहले इन्हें मंडल सदस्य बनाया गया था।
तीन भाषा पढ़ाने का प्रावधान, हटाना गलत
मंडल सदस्यों का कहना है कि संस्कृत को लेकर संवैधानिक प्रावधान है। इसे हटाना गलत था। इसका पहले विरोध होना था। दसवीं में तीन भाषाएं पढ़ाने का प्रावधान है। इसकी अनिवार्यता खत्म होने से परेशानी बढ़ती । जैसे-जैसे वोकेशनल विषय का दायरा बढ़ता, संस्कृत से छात्र दूर होते जाते। इसलिए तीसरी भाषा की अनिवार्यता जरूरी है। माशिमं को यह कहा गया है कि जो छात्र वोकेशनल विषय पढ़ रहे हैं, उनकी सात विषय में परीक्षा हो।
– माशिमं के सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने के एक सप्ताह का समय बचा है। इससे पहले मंगलवार को सामान्य सभा की बैठक बुलाई गई। नियमों के तहत हर छह महीने में यह बैठक होनी थी। लेकिन तीन साल में यह पहली बार हुई। वह भी खानापूर्ति के लिए ही।
– पिछले तीन बरसों में माशिमं की विभिन्न समितियों जैसे, परीक्षा, परीक्षाफल, मान्यता व अन्य में लिए गए निर्णय का अनुमोदन किया गया। कुछ ऐसे विषय थे जिस पर अब सदस्यों ने ऐतराज जताया है। उसमें से एक विषय वित्तीय अधिकार से संबंधित था।
– माशिमं से साल 2012 में एक बार में खर्च करने के वित्तीय अधिकार को बढ़ाकर 40 लाख रुपए किया गया था। इससे पहले यह 25 लाख रुपए तक था। इस पर भी सदस्यों ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था का बरकरार रखा जाए।