सभी यूनिवर्सिटीज में 30 जून के पहले घोषित किए जाएं एग्जाम्स के रिजल्ट : राज्यपाल

भोपाल.बरकतउल्ला सहित प्रदेश के अन्य सभी विश्वविद्यालयों को 30 जून से पहले-पहले सभी परीक्षाओं के रिजल्ट घोषित करना होगा। राजभवन ने कुलपतियों को सख्त लहजे में अकादमिक कैलेंडर के हिसाब से रिजल्ट घोषित करने के निर्देश दिए हैं। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने स्पष्ट कहा कि विवि की गलतियों के कारण किसी भी छात्र का भविष्य खराब नहीं होना चाहिए। साथ ही सख्त हिदायत दी है कि संस्थान में लड़कियाें का शोषण नहीं होना चाहिए।

कुलाधिपति द्वारा शुक्रवार को विश्वविद्यालयों के अकादमिक कैलेंडर की समीक्षा की गई। राजभवन में हुई इस बैठक में प्रदेश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद थे। इस दौरान कुलाधिपति ने कुलपतियों से रिजल्ट की ताजा स्थिति की जानकारी मांगी तो ज्यादातर ने 30 जून तक रिजल्ट घोषित करने की तैयारी की जानकारी दी। जबकि विक्रम विवि उज्जैन सहित अन्य विश्वविद्यालयों ने जुलाई और अगस्त के आखिरी महीने तक जारी किए जाने की बात कही। इसके पीछे कर्मचारियों की हड़ताल सहित अलग-अलग कारण गिनाए। कुलाधिपति ने रिजल्ट में देरी पर नाराजगी जताते हुए अकादमिक कैलेंडर के अनुसार ही काम करने को कहा।

विश्वविद्यालयों को ये निर्देश भी दिए

– बीएड और अन्य कोर्स में एडमिशन और शोध कार्य के लिए गरीब वर्गों के छात्र-छात्राओं के आवेदनों पर तत्परता से कार्यवाही करें।

– परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए बार कोड सिस्टम का उपयोग करें।
– शोध तथा अनुसंधान करने वाले छात्रों को अच्छा गाइड उपलब्ध कराए।

– सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत से संबंधित प्रतियोगिता, कार्यक्रम, नृत्य और वर्कशाप आयोजित किए जाएं।

– प्रोफेसर्स और संकाय से संबंधित छात्रों की संख्या की जानकारी 20 दिन के अंदर उच्च शिक्षा विभाग को भेजें।

निर्देश…कैमरों की निगरानी में हो परीक्षाएं
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में ही हों। खासकर पीएचडी के लिए होने वाले वायवा की ऑडियो और वीडियाे रिकार्डिंग करने को कहा जिससे पारदर्शिता बनी रहे। बीयू की आेर से बताया गया कि विवि की परीक्षाओं के लिए 100 केंद्र चिन्हित हैं। इनमें से 42 में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। 58 में लगना बाकी हैं।

तैयारी…दैवेभो कर्मचारी हाेंगे नियमित
उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालयों में भी मेधावी विद्यार्थी योजना लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार विश्वविद्यालयों के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने जा रही है। इसलिए विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि दैनिक वेतन भोगी के बारे में वे सही जानकारी सरकार को उपलब्ध कराएं।

नंबर बढ़वाने के लिए मांगते हैं पैसे, पीएचडी के नाम पर शोषण

राज्यपाल पटेल ने उच्च शिक्षा में चल रहे गोरखधंधे की कलई खोलकर रख दी। उन्होंने बैठक में साफ कर दिया कि मेरे पास ऐसे स्टूडेंट्स आते हैं जिनसे नंबर बढ़वाने के लिए पैसे की मांग की जाती है। यह स्थिति मेडिकल स्टूडेंट्स के मामले में ज्यादा है। ऐसा सुनकर तकलीफ होती है कि आखिरकार गरीब बच्चे कैसे पढ़ाई करेंगे। इतना ही नहीं पीएचडी करवाए जाने के नाम पर छात्रों का शोषण किया जाता है। यह सब नहीं चलेगा। अगर इस तरह की कहीं से भी आगे कोई शिकायत आती है तो तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राज्यपाल ने कहा कि यह ठीक नहीं है कि राज्य सरकार को स्टाफ की जानकारी नहीं भेजी जाती है। कहां कितने प्रोफेसर हैं, कोई हिसाब नहीं रहता है। कहीं शिक्षक ज्यादा हैं। पढ़ने वाले बच्चे नहीं हैं। कहीं, बच्चे ज्यादा हैं तो पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बीआर नायडू ने राज्यपाल से विश्वविद्यालयों से राज्य सरकार को जानकारी न भेजे जाने की बात कही, जिस पर राज्यपाल ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आगे इस तरह की शिकायत नहीं आए, इस बात का सभी ध्यान रखें।

जनता से सीधे जुड़े हों पीएचडी के विषय
राज्यपाल ने कहा कि भविष्य में पीएचडी के ऐसे विषय तय किए जाएं जो जनता से सीधे जुड़े हों, जैसे केंद्र और राज्य सरकार गरीबों के कल्याण के लिए हर साल बढ़ी राशि खर्च करती है, लेकिन फिर भी गरीबी खत्म नहीं हो रही है। इसलिए जो छात्र पीएचडी करना चाहते हैं उन्हें ऐसे विषय दिए जाएं जिससे वे फील्ड में जाएं और उन गरीबों के बीच पहुंचे जिनके लिए राज्य सरकार उनके कल्याण के लिए बढ़ी राशि खर्च करती है, उस राशि का हिसाब किताब उनकी पीएचडी में हो तो इससे जनता का कल्याण हो सकेगा। और लोगों को जमीनी हकीकत भी समझ में आ सकेगी।