सहकारी समितियों के चुनाव में होगी सरकार की परीक्षा

विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की परीक्षा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव में हो सकती है। जनवरी में सवा चार हजार समितियों में से लगभग तीन हजार समितियों के चुनाव प्रस्तावित हैं।

निर्वाचन प्राधिकारी प्रभात कुमार पाराशर ने सहकारिता विभाग को प्रस्ताव भिजवाने और चुनाव के मद्देनजर कानून व्यवस्था का इंतजाम करने के लिए पत्र लिखकर हलचल तेज कर दी है। हालांकि, सरकार विधानसभा चुनाव से पहले किसी और बड़े चुनाव के पचड़े में नहीं पड़ना चाहती है, इसलिए सहकारी चुनाव से बचने के रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं।

सहकारी समिति के चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हैं लेकिन इसमें राजनीतिक दखल पूरी तरह होता है। सीधे ग्रामीणों से जुड़ा मामला होने की वजह से भाजपा, कांग्रेस दोनों समर्थकों को न सिर्फ चुनाव मैदान में उतारती हैं बल्कि जिताने के लिए पूरा दम भी लगाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की सियासत पंचायत और सहकारी समिति चुनावों के ईद-गिर्द ही घूमती है।

इनमें राजनीति गुणा-भाग भी जमकर होता है और इसका असर स्थानीय राजनीति पर भी पड़ता है। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। सरकार चुनाव मोड में आ चुकी है, ऐसे में चुनावी नतीजे माहौल पर असर डाल सकते हैं। यही वजह है कि सरकार की ओर से अभी तक चुनाव कराने को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए गए हैं। यह बात इससे भी साबित होती है कि निर्वाचन प्राधिकारी कार्यालय को अभी तक लगभग सौ समितियों के चुनाव कराने के प्रस्ताव ही मिले हैं, जबकि चुनाव तीन हजार से ज्यादा समितियों के होने हैं।

120 दिन पहले मिल जाने चाहिए प्रस्ताव

सहकारी अधिनियम में समिति का कार्यकाल समाप्त होने के 120 दिन पहले विधिवत सहायक या उप पंजीयक के माध्यम से प्रस्ताव निर्वाचन प्राधिकारी कार्यालय को भेजे जाने का प्रावधान है। इस हिसाब से 18 सितंबर तक जिन समितियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनके प्रस्ताव आ जाने चाहिए थे पर उज्जैन, विदिशा सहित कुछ जिलों से ही प्रस्ताव आए हैं।

चुनाव टालने का यह बन सकता है बहाना

सूत्रों का कहना है कि चुनाव टालने के लिए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। यही वजह है कि सहकारिता विभाग का कोई भी अधिकारी चुनाव के मुद्दे पर ऑन रिकॉर्ड बात करने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि चुनाव को टालने के लिए समितियों की सीमा का पुनर्गठन बहाना बन सकता है। आयुक्त सहकारिता आशुतोष अवस्थी ने समितियों का पुनर्गठन करने सितंबर 2017 में सभी सहकारी बैंकों के सीईओ को पत्र लिखकर कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इसमें पुनर्गठन के पैमाने भी बताए गए हैं।

…तो बैठाने पड़ेंगे प्रशासक

सूत्रों का कहना है कि यदि समितियों के चुनाव 18 जनवरी से पहले नहीं होते हैं तो फिर इनमें प्रशासक बैठाने पड़ेंगे। नियमानुसार निर्वाचित संचालक मंडल 18 जनवरी के बाद काम नहीं कर पाएगा। प्रशासक तृतीय श्रेणी से निम्न स्तर का अधिकारी नहीं होगा। निर्वाचन प्राधिकारी प्रभात कुमार पाराशर का कहना है कि हमने सहकारिता विभाग को चुनाव के संबंध में पत्र लिख दिया है। कुछ समितियों के चुनाव कराने को लेकर प्रस्ताव मिले हैं। कानून व्यवस्था को लेकर कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों को निदर्ेेशित करने की बात भी कही गई है।